मंत्री की पत्नी पर 'मेहरबान' हुए उत्तराखंड के CM
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उत्तराखंड के कृषि मंत्री हरक सिंह रावत की पत्नी और पौड़ी जिला पंचायत की अध्यक्ष दीप्ति रावत के लिए शिक्षा विभाग में नियमों को ताक पर रखने की तैयारी चल रही है।
अशासकीय स्कूलों के शिक्षकों को विभागीय कार्यालयों में अटैच करने का नियम नहीं है। इसके बावजूद दीप्ति को देहरादून से पौड़ी स्थित संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय से संबद्ध करने की तैयारी है। अटैचमेंट के लिए खुद सीएम हरीश रावत ने शासन स्तरीय अफसरों को आदेश जारी किया है।
दीप्ति रावत राजधानी के बल्लूपुर स्थित अशासकीय विद्यालय भवानी बालिका इंटर कालेज में सहायक अध्यापिका हैं। वह 2008 में ऋषिकेश से तबादले पर दून आई थी। इस बीच करीब डेढ़ वर्ष पूर्व वह पौड़ी जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गई।
अब दीप्ति दून से पौड़ी में संयुक्त निदेशक के दफ्तर में अटैचमेंट चाहती हैं। उनका कहना है कि दून में नौकरी के चलते जिला पंचायत की बैठकों के लिए समय नहीं मिल पा रहा है। इस पर मुख्यमंत्री ने भी शासन को आदेश कर दिए हैं।
अब अफसर परेशान हैं, क्योंकि अशासकीय स्कूलों के शिक्षक को सरकारी दफ्तर में अटैच नहीं किया जा सकता। हालांकि, सीएम के आदेश के चलते वे नियमावली में कोई सिरा तलाशने में जुट गए हैं।
नियमावली में सिर्फ विधायक, सांसद का जिक्र
विभागीय सूत्र बताते हैं कि अशासकीय स्कूलों की नियमावली में सिर्फ सांसदों और विधायकों के बाबत उल्लेख है।
इसमें लिखा है कि ऐसे स्कूलों के शिक्षक, जो सांसद या विधायक हैं, को संसद और विधानसभा सत्र या अन्य बैठकों में जाने के लिए स्कूल से अवकाश दिया जा सकता है। लेकिन इसमें जिला पंचायत अध्यक्षों के बारे में ऐसा कोई जिक्र नहीं किया गया है।
पौड़ी जिपं अध्यक्ष को बैठकों में जाना है तो वे विद्यालय प्रबंधन से छुट्टी ले सकती हैं। उनके अटैचमेंट की फाइल शासन में आई है। ऐसा नहीं हो सकता, फिर भी इसे दिखाया जा रहा है।
- एस राजू, अपर मुख्य सचिव
अशासकीय स्कूल की शिक्षिका के सरकारी कार्यालय में अटैचमेंट की कोई व्यवस्था नहीं है। नियमावली के हिसाब से ऐसा नहीं किया जा सकता। मामले में उच्च स्तर पर ही निर्णय लिया जाना है।
- एमसी जोशी, शिक्षा सचिव
मैंने अपने पति (मंत्री हरक सिंह रावत) से पौड़ी में तबादले के लिए बोला था। उन्होंने ही सीएम से बात की। दफ्तर में नहीं तो किसी स्कूल में ही तबादला हो जाए तो अच्छा होगा। पौड़ी में रहूंगी तो सुबह साढ़े सात से दोपहर एक बजे तक स्कूल में पढ़ाने के बाद जिला पंचायत की बैठक में जा सकूंगी। लोग दुर्गम से सुगम आना चाहते हैं, मैं तो सुगम से दुर्गम स्कूल मांग रही हूं।
- दीप्ति रावत, शिक्षिका एवं जिला पंचायत अध्यक्ष पौड़ी