रावत दिखाएंगे 'दस का दम', अधिकारी 'बेदम'
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मुख्यमंत्री हरीश रावत अब दस का दम दिखाएंगे। जबकि अधिकारी आचार संहिता के दस दिन आगे खिसकने से बेदम हैं। पिछले एक सप्ताह जिस तरह दिन-रात काम करने की नई प्रणाली विकसित हुई है। उसने अधिकारियों का शिड्यूल बिगाड़ मुसीबत बढ़ा दी है।
अब उन अधिकारियों की चिंता भी बढ़नी स्वाभाविक है जो मानकर कर चल रहे थे कि आचार संहिता लगते ही उनका तबादला फिलहाल मई आखिर तक टल जाएगा।
अधिकारियों की मुसीबतें बढ़ गई
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने चार फरवरी से जिस तरह देर रात अधिकारियों की बैठकें शुरू की हैं। उससे प्रशासनिक स्तर पर वर्क कल्चर तो विकसित हुआ है लेकिन टाइम मैनेजमेंट से चलने वाले अधिकारियों की मुसीबतें बढ़ गई हैं।
अभी तक अधिकारी मानकर चल रहे थे कि पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही कुछ राहत मिलेगी।
एक प्रमुख सचिव कहते हैं अब दस दिन फिर उसी तनाव और दबाव में काम करना होगा। उनका कहना है कि इस वर्क कल्चर से महिला अधिकारियों को अधिक दिक्कतें आ रही हैं। उनकी फैमली डिस्टर्ब हो रही है।
घोषणाओं की संभावनाएं बढ़ीं
हरीश रावत ने सैकड़ों योजनाओं की घोषणा और शिलान्यास कर उन्हें जमीन पर तो उतार दिया अब अधिकारियों पर इन्हें जल्द से जल्द शुरू करने का दबाव है। ऐसे में दस दिन मिल जाने से और घोषणाओं की संभावनाएं बढ़ गई है। मुख्यमंत्री और उनके कैंप के लोगों को दस दिन की मोहलत संजीवनी से कम नहीं लग रही है।
मैं ज्यादा बदलाव का पक्षधर नहीं हूं। जो काम करेगा उसे काम दिया जाएगा जो नहीं करना चाहता उससे काम वापस ले लिया जाएगा। अधिकारियों को चाहिए कि अपना काम करें। अगर कोई रास्ता नहीं निकलता तो बदलाव भी जरूर होगा।
-हरीश रावत
जनता को मूर्ख बनाया गया : तीरथ
प्रदेश में हुए ताबड़तोड़ शिलान्यास व लोकार्पण को भाजपा अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत ने चुनावी स्टंट करार दिया। उन्होंने कहा कि हर जनपद में जिस तरह हेलीकॉप्टर लेकर मंत्रियों को भेजा गया उससे राजकोष को करोड़ों की चपत लगी।
मुख्यमंत्री को इसका हिसाब देना चाहिए। वैसे तो हरीश रावत कहते है कि वे जमीन के आदमी है और पूरा मंत्रिमंडल आसमान में उड़ान भर रहा है।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि जहां हेलीकॉप्टर उपलब्ध नहीं हुआ वहां प्रभारी मंत्री पंहुचे ही नहीं। आपदा ग्रस्त क्षेत्रों की अनदेखी कर जनता का मूर्ख बनाया गया। शिलान्यासों की संख्या बढ़ाने के लिए एक दो लाख वाले कार्य भी सूची में शामिल किए गए।
एक योजना के शिलान्यास पर बीस हजार रुपए का पत्थर पर खर्च हुआ। लोकार्पण व शिलान्यास में भाजपा विधायकों की अनदेखी की गई है।