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सरकार बचाने को मंत्रियों की शिकायतों पर आंखें मूंदे रहे हरीश रावत
ब्यूरो / अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Tue, 31 Jan 2017 10:43 AM IST
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हरीश रावत
- फोटो : AmarUjala
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने स्वीकार किया कि प्रदेश में सत्ता संभालने के बाद के दौर में वे मजबूर मुख्यमंत्री साबित हुए। रावत के मुताबिक, सरकार बचाने के लिए वे मंत्रियों के खिलाफ शिकायतों को नजरअंदाज कर आंखें मूंदे रहे।
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उन्होंने कहा कि पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य के खिलाफ सहकारी बैंकों में भर्ती को लेकर शिकायत थी। हरक सिंह रावत को मंत्रिमंडल में रखना उनकी सबसे बड़ी मजबूरी थी। रावत ने एक पूर्व कांग्रेसी विधायक को भी निशाने पर लिया।
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सोमवार को हल्द्वानी पहुंचे मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि यशपाल आर्य के खिलाफ सहकारी बैंकों में भर्ती को लेकर ऐसी शिकायतें थीं कि उनके ऊपर कार्रवाई की जा सकती थी, लेकिन बहुमत बनाए रखने की मजबूरी के चलते उन्हें कार्रवाई से परहेज करना पड़ा।
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सरकार को बहुमत में बनाए रखने के लिए कांग्रेस के बागी नेताओं से समझौता करना उनकी मजबूरी थी। जिन नेताओं से समझौता नहीं हो पाया, वे मार्च 2016 में पार्टी छोड़कर चले गए। रावत ने कहा कि एक विधायक ने तो सिर्फ मलिन बस्तियों को नियमित करने के कानून लाने के कारण बगावत की। विधायक कानून में संशोधन चाहते थे। मलिन बस्तियों की जमीन हथियाने में विधायक के समर्थक खुलकर शामिल थे।
मुख्यमंत्री की नाराजगी हरक सिंह रावत को लेकर अधिक दिखी। रावत ने कहा कि हरक सिंह रावत जैसे व्यक्ति को मंत्रिमंडल में रखना सबसे बड़ी मजबूरी थी। उल्लेखनीय है कि 18 मार्च, 2016 को सदन में कांग्रेस नेता विजय बहुगुणा, हरक सिंह सहित कई विधायकों ने बगावत कर भाजपा का दामन थामा था।
चुनाव नजदीक आने के साथ ही पूर्व मंत्री यशपाल आर्य भी कांग्रेस का साथ छोड़ गए। आर्य कांग्रेस कार्यकाल में सहकारिता मंत्री रहे और सहकारिता में भी कई नेता उनकी भूमिका को लेकर मुख्यमंत्री हरीश रावत से शिकायत करते रहे। इसके बावजूद रावत ने चुप्पी साध कर रखी।