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हरीश के तीखे बोल, कहा जानता हूं हड़ताल तोड़ना

Fri, 10 Oct 2014 09:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 10 Oct 2014 09:13 AM IST
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harish rawat become angry on strike.
उत्तराखंड में कर्मचारी संगठनों द्वारा बार-बार की जा रही हड़ताल के मामले में मुख्यमंत्री हरीश रावत के तेवर तल्ख हो गए हैं। वे बोले कि ‘नो वर्क नो पे’ का आदेश कर दें तो हड़ताल वहीं टूट जाएगी।
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सीएम ने कहा कि वैसे सारे मसले संवाद से हल हो सकते हैं। फिर भी असलहा बाबू के तबादले पर कलक्ट्रेट सात दिन के लिए बंद हो जाता है। लिपिक को डांटने पर समाज कल्याण में हड़ताल हो जाती है। ऐसा सिर्फ उत्तराखंड में ही होता है। ‘अगर मैं कल्याण करने पर तुल जाऊं तो फिर क्या होगा?
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उभर आई सीएम की पीड़ा
बृहस्पतिवार को उत्तराखंड ऊर्जा कामगार संगठन के अधिवेशन में मुख्यमंत्री हरीश रावत की पीड़ा उभर आई। शुरुआत में समझाने के अंदाज में बोले कि कर्मचारी संगठन, ट्रेड यूनियनों से प्रार्थना है कि संवाद से मसले हल करें। फिर रेलवे ट्रेड यूनियन, केंद्र सरकार की फेडरेशन का उदाहरण दिया कि यह संगठन हर महीने एक-दो मसले संवाद से हल कराते हैं। वे कितनी हड़ताल करते हैं। जल्दबाजी में किए गए काम के परिणाम अच्छे नहीं आते।
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हड़ताल के नाम पर हो रहा अपराध

harish rawat become angry on strike.

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर संवर्ग दूसरे के चक्कर में हड़ताल कर रहा है। विसंगतियां दूर होनी चाहिए लेकिन एक के चक्कर में चार खड़ी हो गईं तो क्या होगा? सब नायब तहसीलदार बनना चाहते हैं। अगर इसी से सारी सीटें भर दीं और सीधी भर्ती न हुई तो एसडीएम के ऊपर प्रशासनिक ढांचे का क्या होगा?

फिर मुख्यमंत्री के तेवर तल्ख होने लगे बोले-मिनिस्ट्रीयल कर्मी तालाबंदी जैसा संज्ञेय अपराध करने लगते हैं। सरकार कमजोर हो सकती है लेकिन अब इतनी भी कमजोर नहीं है कि संज्ञेय अपराध का संज्ञान न ले।

पटवारियों को लिया निशाने पर
सीएम बोले-इधर पटवारी उबल रहे हैं। अमीन साहबान कहते हैं कि ‘बिना धनुष तोड़े अयोध्या नहीं लौटेंगे।’ सब दूसरे प्रदेश की अच्छी चीज मांगते हैं। राज्य को चूं-चूं का मुरब्बा बना दिया। ऐसा रहा तो क्या राज्य रहेगा और क्या राज्य का भविष्य?

गहराई से चिंतन करने की जरूरत है। फिर हिमाचल प्रदेश और गोवा का उदाहरण दिया और कहा कि ये राज्य नो हड़ताल की तरफ बढ़ रहे हैं। इससे वहां स्थायित्व है। उत्तराखंड ही ऐसा राज्य है जहां लिपिक ग्रेड वाले संयुक्त सचिव तक पहुंचे हैं।

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