हरीश की पलटवार, 'PDF हटा तो छह महीने भी सरकार नहीं'
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उत्तराखंड कांग्रेस के विचार मंथन शिविर में पत्र के माध्यम से पीडीएफ (प्रगतिशील लोकतांत्रिक मोर्चा) का मामला उठाने वालों पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने रविवार को सीधा हमला बोला। मंथन के दूसरे दिन दोपहर जो नेता और कार्यकर्ता पार्टी को अपनी बात सुनाने पहुंचे थे उन्हें रावत ने खरी-खरी सुनाई।
सीएम ने कहा, कल से देख रहा हूं एक ही राग अलापा जा रहा है। इस दौरान सीएम इतने तल्ख हो गए कि उन्होंने इशारों में यहां तक कह दिया कि अगर पीडीएफ से किनारा करते हैं तो सरकार छह महीने भी नहीं चल सकती।
रविवार को मुख्यमंत्री बाहर निकले और मीडिया से रूबरू हुए तब भी उनके तेवर कड़े थे। कहा, पीडीएफ को दरकिनार करने का मुद्दा उठाने वालों ने सुनियोजित और असामान्य तरीके से जोड़-तोड़ करके इसे मुद्दा बना दिया। मैं सही मांग और इस व्यवहार को बेहतर समझता हूं।
जब तक पार्टी की हरी झंडी, हरीश वही कहेगा
उन्होंने कहा पीडीएफ अभिन्न अंग है। आगे पार्टी क्या निर्णय लेती है, पालन करना है। कहा कि सिद्धांतों की बात है जब तक पार्टी की हरी झंडी है हरीश रावत भी वही कहेगा। शिविर में पांच-सात फीसदी को छोड़ दें तो बहुत अच्छे सुझाव आएं हैं। सरकार और संगठन उन्हें गंभीरता से लेगा।
प्रेसवार्ता के दौरान पास बैठे प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय की पीडीएफ को लेकर उठाई जा रही मांग पर सीएम ने कहा कि चिंता होनी चाहिए। कार्यकर्ताओं ने भी मंथन शिविर में बात कही है। इस विषय पर पीडीएफ नेताओं से बात करूंगा।
प्रदेश अध्यक्ष ने पीडीएफ के मुद्दे पर कहा कि मैं पहले भी दो बातें कह रहा था। एक कार्यकर्ताओं की उपेक्षा न हो और दूसरी पीडीएफ के एक सदस्य जो स्वास्थ्य कारणों से सक्रिय नहीं हैं उनके संबंध में सरकार कोई फैसला ले। कहा कि मुख्यमंत्री से बात हुई है कोई रास्ता जरूर निकालेंगे।
आप हमें भिड़ाना चाहते हैं : किशोर
पीडीएफ को लेकर 15 विधायकों की ओर से आए पत्र को प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय अनुशासनहीनता नहीं मानते हैं। उन्होंने कहा कि इससे पार्टी को नुकसान हुआ है, यह अच्छी बात नहीं है। विधायकों पर कार्रवाई के सवाल पर बोले कि आप हमें भिड़ाना चाहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए था।
सीएम का कहना
हॉल में बैठे लोगों में से 75 फीसदी ऐसे हैं जो हमारे सामने राजनीति में बड़े हुए हैं। कहा कि उनके मुंह से कुछ बातें सुन रहा हूं तो तकलीफ हो रही है।
हरीश रावत, मुख्यमंत्री
क्या है मामला
पार्टी की प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी को एक खत भिजवाया गया था। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा समर्थकों समेत लगभग 15 विधायकों ने सरकार में सहयोगी पीडीएफ कोटे के मंत्रियों द्वारा कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा करने और उनके कार्यों से पार्टी की छवि खराब होने का मुद्दा उठाते हुए पत्र थमाया था। इसमें पीडीएफ के मंत्रियों की संख्या भी कम करने की मांग की गई थी।