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उत्तराखंड का सीएम बदला, सरकार नहीं: बहुगुणा

Sun, 01 Feb 2015 01:35 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 01 Feb 2015 01:35 PM IST
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harish rawat and vijay bahuguna dispute.

अपने मुख्यमंत्रित्व काल में की गई घोषणाओं पर अमल न होने से नाराज विजय बहुगुणा ने मुख्यमंत्री हरीश रावत पर हमला करते हुए यह नसीहत दी कि पिछले साल महज सीएम बदला है, सरकार नहीं।

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यानी सरकार कांग्रेस की ही है और पुराने फैसलों-घोषणाओं पर काम किया जाए। बिलकुल सही कहा बहुगुणा साहब ने। सरकार नहीं बदली है। जैसी उनकी थी, वैसी ही इनकी। कामकाज का जो बुरा हाल तब था, अब भी वैसा ही है। इस बयान की तसदीक करती पेश हैं महज दो मिसालें।
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दोनों देख गए दशा, बदला कुछ नहीं
कर्णप्रयाग/थराली में काम धरातल पर नहीं दिख रहे हैं और घोषणाओं के पुलों से नदियां पार नहीं होतीं। दोनों मुखियाओं ने अपने-अपने वक्त में कर्णप्रयाग के सिमली और थराली के चेपड़ों में मोटर पुल बनाने की घोषणा तो की।
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लेकिन कार्रवाई सर्वे और इस्टीमेट तैयार करने तक सिमटी रही जिसके चलते दोनाें तहसीलों के 22 से अधिक गांवों के लोग 10 से 15 किमी की अतिरिक्त दूरी नाप रहे हैं।

सिमली और कर्णप्रयाग को जोड़ने के लिए पिंडर नदी पर मोटर पुल और थराली के चेपड़ों में लौह पुल बनाने की घोषणा 2012 में तत्कालीन सीएम विजय बहुगुणा ने की थी। लेकिन बात घोषणा तक ही रही। इसके बाद मुख्यमंत्री बने हरीश रावत का ध्यान इस समस्या पर गया।

पूर्व जिला पंचायत सदस्य महेश शंकर त्रिकोटी बताते हैं कि फरवरी, 2014 में हरीश रावत ने भी पुलों का काम पूरा कराने का भरोसा दिलाया। लेकिन उनकी सरकार भी इसे पूरा नहीं कर पा रही है।

आपदा में बहा पुल, अब तक नहीं बना

जोशीमठ (चमोली) के लामबगड़ क्षेत्र में वर्ष 2013 की जलप्रलय के दौरान खीरों गांव में अलकनंदा नदी पर से बहा पुल आज तक नहीं तैयार हो पाया। सरकार का रास्ता देख-देख थके चुके ग्रामीणों ने अपने संसाधनों से लकड़ी का पैदल पुल बना डाला।

 
हालांकि नदी का पानी बढ़ा तो यह बह सकता है। आपदा के बाद मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और कमिश्नर सबने बारी-बारी से दौरा कर पैदल पुल के साथ ही पेयजल लाइन, विद्युत लाइन और पैदल रास्तों की शीघ्र मरम्मत का आश्वासन दिया था, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।

ग्राम प्रधान खीरों गुलाबी देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य सुशीला देवी का कहना है कि पुल निर्माण के लिए लोनिवि ने दो बार सर्वे भी किया पर किया कुछ नहीं।

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