फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   harish rawat and CM vijay bhuguna

मेल नहीं खा रही रावत और बहुगुणा की राय

Wed, 16 Oct 2013 07:43 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 16 Oct 2013 07:43 AM IST
विज्ञापन
harish rawat and CM vijay bhuguna

केंद्रीय जल संसाधन मंत्री हरीश रावत के पुनर्निर्माण से संबंधित सुझाव प्रदेश सरकार की कोशिश से मेल नहीं खा रहे हैं।

विज्ञापन


सरकार का रुख आलोचनाओं के घेरे में
रावत की ओर से वैकल्पिक मार्ग और प्री फेब्रीकेटिड मकानों को लेकर दिए गए सुझावों पर प्रदेश सरकार का रुख आलोचनाओं के घेरे में रहा है। केदार घाटी में प्री फेब्रीकेटिड मकानों पर प्रदेश सरकार का जोर है। पर यह साफ नहीं है कि पैदल मार्ग के पड़ावों को किस तरह से बसाया जाएगा।

प्रदेश सरकार बीआरओ की शिकायत करते नहीं थक रही है पर रावत अपने फील्ड एक्सपीरियंस के जरिए बीआरओ को बेहतर बता रहे हैं। इसी तरह वैकल्पिक मार्ग को लेकर भी प्रदेश सरकार और हरीश रावत के दृष्टिकोण में खासा अंतर है।
विज्ञापन


सरकार ने बेहतर काम किया
हालांकि रावत इस अंतर को खास तवज्जो न देने की बात भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने क्षेत्र भ्रमण के अनुभव के आधार पर यह सुझाव प्रदेश सरकार को दिए हैं। हरीश रावत के मुताबिक प्रदेश सरकार ने आपदा के बाद बेहतर काम किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये हैं हरीश रावत के सुझाव
-प्रदेश सरकार केदारनाथ का पैदल मार्ग बेहतर एलाइनमेंट के साथ तुरंत तैयार कराया जाए।
-केदारनाथ और गौरीकुंड के बीच ट्रांजिट प्वाइंट बने जिनमें एक समय में कम से कम चार हजार लोगों के रहने की व्यवस्था हो पाए।
-केदारनाथ में प्री फेब्रीकेटिड आवास से काम नहीं चलेगा। इनकी जगह पक्के स्ट्रक्चर बने जिसमें ड्रेनेज आदि की पूरी व्यवस्था हो।
-आपदा प्रभावित क्षेत्रो में सड़क मार्ग सीमा सड़क संगठन के पास रहें। स्थानीय लोगों ने बीआरओ के काम की खासी तारीफ की है।

-चार धाम के लिए वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था की जगह पुराने मार्ग बेहतर अलाइमेंट के साथ तैयार किए जाएं।
-नदियों के किनारे का और भूस्खलन क्षेत्रों का ट्रीटमेंट कराया जाए।
-आपदा प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के क्षमता विकास पर ध्यान दिया जाए। मुआवजा एक हद तक ठीक है पर मुआवजा बांटकर चुप रह जाना ठीक नहीं।

सरकार का दृष्टिकोण
-इससे सरकार सहमत है। हालांकि केदारनाथ और गौरीकुंड के बीच केट्रांजिट प्वाइंट या पड़ावों पर अभी स्थिति साफ नहीं है। सरकार का जोर प्री फेब्रीकेटिड मकानों के निर्माण पर है।

-बीआरओ की प्रदेश सरकार खुद तीन बार शिकायत कर चुकी है। सरकार का कहना है कि बीआरओ का काम ढीला है। जबकि रावत कह रहे हैं कि बीआरओ के काम को लेकर उन्हें अपना नजरिया बदलना पड़ा।
-पहले उन्हें शिकायत थी पर केदारनाथ की यात्रा के बाद अब उन्होंने सबको ईमेल करके कहा है कि बीआरओ ने बेहतर काम किया है।

-आपदा प्रभावित क्षेत्रों में चार धाम यात्रा के वैकल्पिक मार्ग बनाए जाएंगे ताकि यात्रा के समय एक रूट के बंद होने
पर दूसरे रूट का इस्तेमाल किया जा सके।
-क्षमता विकास के लिए प्रदेश सरकार ने अभी कोई ठोस कार्ययोजना सामने नहीं रखी है।

फेसबुक पर राय देने के लिए क्लिक करें...

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed