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हां, मैं मानता हूं मुझसे गलती हुई: हरीश रावत

Wed, 12 Mar 2014 05:35 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 12 Mar 2014 05:35 PM IST
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harish accepted discrimination in distribution

लोकसभा चुनावों के मद्देनजर सीएम हरीश रावत ने मंत्रालय बंटवारे से उठी नाराजगी पर डैमेज कंट्रोल शुरू कर दिया है।

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मंत्रियों के विभागों को लेकर घिरे मुख्यमंत्री हरीश रावत ने स्वीकार कर लिया है कि उनसे गलती हुई है। उनका कहना है कि फैसला लेने में चूक(एरर ऑफ द जजमेंट) हुई है।

उन्होंने मीडिया से अपने विभागों को लेकर स्पष्ट किया कि जो विभाग जैसे पीडब्ल्यूडी, ऊर्जा आदि उनके मूल विभागों के साथ नहीं लिखे गए हैं उन पर विचार कर सकते हैं।
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उन्होंने विभागों में तालमेल बैठाने की भी बात कही। मुख्यमंत्री के गलती मानते ही नाराज महिला मंत्रियों इंदिरा ह्दयेश और अमृता रावत की ओर से भी बयान आ गए। दोनों ही नेताओं कहना है कि मुख्यमंत्री अपनी गलती जल्द सुधारें।

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'अमृता से विभाग लेने में हुई गलती'

harish accepted discrimination in distribution

विभागों के बंटवारे को लेकर अभी तक खामोश हरीश रावत ने मंगलवार को चुप्पी तोड़ी। उन्होंने मीडिया से कहा कि उन्होंने बड़ी कोशिश कर विभागों का बंटवारा किया था। फिर भी कुछ अन्य पहलूओं पर ध्यान देना चाहिए था।

उन्होंने स्वीकारा कि अमृता रावत से उद्यान विभाग नहीं लेना चाहिए था। जब अन्य मंत्रियों को उनके विभाग मिले हैं तो फिर उन्हें भी देना चाहिए था।

अमृता को दी क्लीनचिट
उन्होंने अमृता रावत को क्लीनचिट भी दी। उनका कहना है कि उद्यान विभाग में कोई अनियमितता नहीं हुई है मैं फाइल मंगाकर देख ली है। सतपाल महाराज एक किसान भी हैं उन्हें जिस स्कीम के तहत लाभ मिला है उसकी शर्तों को पूरा करते हैं। उन्हें तो धन्यवाद दिया जाना चाहिए जिन्होंने स्कीम का फायदा उठाया।

गलती का शीघ्र सुधार करें: सतपाल महाराज

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सांसद सतपाल महाराज का कहना है कि उद्यान विभाग पर मुख्यमंत्री ने गलती मान ली है तो वह अब शीघ्र सुधार करें और अमृता रावत को उद्यान विभाग दें। उन्होंने फिर दोहराया कि नियमों के अन्तर्गत ही उन्होंने पॉली हाउस सब्सिडी ली है। तथ्यों से अवगत होने के बाद मुख्यमंत्री ने माना कि गलती हुई है।

वादा पूरा करें मुख्यमंत्री: इंदिरा
मेरी कोई शिकायत नहीं है। बस मैं चाहती हूं मुख्यमंत्री अपने वायदे को पूरा करें। मैंने पहले भी कहा कि मेरी क्षमताओं का उपयोग राज्य हित में करें। मेरी कोई विभागीय मांग नहीं थी, उन्होंने अपना वादा पूरा नहीं किया।

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