कांवड़ यात्रा 2020: यूपी-उत्तराखंड बॉर्डर एरिया सील, करीब पांच हजार वाहनों को लौटाया
- इस बार सावन माह में नहीं होंगे नीलकंठ के दर्शन
- पैम्फ्लेट लेकर दिल्ली, पंजाब, हरियाणा रवाना हुए पुलिस कर्मी
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विस्तार
कोरोना के चलते इस साल उत्तर भारत की सबसे बड़ी आध्यात्मिक कांवड़ यात्रा स्थगित कर दी गई है। रविवार को गुरु पूर्णिमा के दिन भी पुलिस ने उत्तराखंड और यूपी की सीमाओं पर सख्ती का रिहर्सल किया। हरिद्वार आने वाले हजारों लोगों को राज्य में प्रवेश नहीं करने दिया गया। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर हरिद्वार रुड़की और ऋषिकेश में अपने गुरुजनों की पूजा कर उनसे आशीर्वाद लेने आए करीब पांच हजार वाहनों को पुलिस ने बॉर्डर से ही लौटा दिया।
रविवार को गुरु पूर्णिमा का पर्व होने के चलते सुबह से ही रुड़की, हरिद्वार और ऋषिकेश आदि स्थानों पर स्थित आश्रमों और अखाड़ों में जाने वालों की भारी भीड़ बॉर्डर पर उमड़ने लगी थी।
गुरु पूर्णिमा पर हर साल देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालुओं का हरिद्वार आवागमन होता है जो गंगा स्नान करने के साथ ही विभिन्न आश्रमों में पहुंचकर अपने गुरु की पूजा करने के साथ ही उनसे आशीर्वाद भी प्राप्त करते हैं, लेकिन इस बार लॉकडाउन के चलते पुलिस ने सुबह से ही सख्ती कर दी थी।
पुलिस प्रशासन ने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बॉर्डर आज से ही पीएसी के हवाले कर दिए हैं। भगवानपुर में मंडावर और मंगलौर में नारसन और लक्सर में पुरकाजी और बालावाली का बॉर्डर सील कर दिया गया है। सभी रास्तों पर पुलिस तैनात कर दी गई है।
साथ ही अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है। एसपी देहात एसके सिंह ने बताया कि सभी को सख्त हिदायत दी गई है कि किसी भी सूरत में कोई भी कांवड़िया उत्तराखंड में प्रवेश न करने पाए।
हरकी पैड़ी पर कांवड़ियों की एंट्री बैन
हरकी पैड़ी पर कांवड़ियों की एंट्री रोकने के लिए हरिद्वार कोतवाली पुलिस ने कमर कस ली है। हरकी पैड़ी के संपर्क मार्गों पर बैरिकेडिंग करते हुए चाक चौबंद इंतजाम किए गए हैं। हालांकि अस्थि विसर्जन के लिए आ रहे यात्रियों को रोका नहीं जाएगा। सोमवार से कांवड़ यात्रा शुरू होने जा रही है। कांवड़ियों को रोकने के लिए जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों पर विशेष इंतजाम किए गए हैं, लेकिन फिर भी यदि कोई आंख बचाकर यहां आ पहुंचता है तो उसे कांवड़ ही नहीं उठाने दी जाएगी।
हरकी पैड़ी पहुंचकर ही कांवड़िए कांवड़ उठाते हैं। इस बार कांवड़ बाजार भी नहीं सज रहा है। कोतवाली प्रभारी अमरजीत सिंह ने बताया कि पोस्ट ऑफिस तिराहा, भीमगोडा चेकपोस्ट, संजय पुल, शिवपुल, हाथी पुल व विष्णु घाट पुल पर पुलिस की तैनाती कर दी गई है। बाकायदा बैरीकेटिंग लगा दिए गए हैं। किसी को भी हरकी पैड़ी नहीं पहुंचने दिया जाएगा। जो व्यक्ति अस्थि विसर्जन करने आ रहे हैं, उन्हें जाने दिया जाएगा।
पैम्फ्लेट लेकर दिल्ली, पंजाब, हरियाणा रवाना हुए पुलिस कर्मी
कांवड़िए हरिद्वार ना आ सकें इसके लिए पुलिस प्रशासन बहुचक्रीय रणनीति बना रहा है। पुलिस प्रशासन की कई टीमें ऐसे पैम्फ्लेट लेकर यूपी, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा, राजस्थान आदिराज्यों में भेजे गए हैं। इन पैम्फ्लेट पर लिखा गया है कि कोरोना के संक्रमण के चलते ज्यादा भीड़ एकत्र होने पर संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है, इसलिए कांवड़ियों का प्रवेश प्रतिबंधित किया गया है।
सीमावर्ती गांव के लोगों से भी मांगा जा रहा सहयोग
उत्तराखंड के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सीमावर्ती गांव के लोगों से भी कांवड़ यात्रा को लेकर सहयोग मांगा है। लक्सर के एसडीएम पूरन सिंह राणा, भगवानपुर के एसडीएम संतोष कुमार पांडे के अनुसार दोनों तरफ से लोगों से संपर्क साधकर कांवड़ियों की रोकथाम के लिए सहयोग मांगा जा रहा है। सीओ मंगलौर अभय प्रताप सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती थानों की पुलिस से भी संपर्क करके कांवड़ियों को रोकने के लिए कहा गया है।
इस बार सावन माह में नहीं होंगे नीलकंठ के दर्शन
कोविड19 की गंभीरता को देखते हुए इस वर्ष सावन माह में मणिकूट पर्वत में स्थित विश्वप्रसिद्ध नीलकंठ मंदिर श्रद्धालुओं के लिए नहीं खोला जाएगा। वहीं ऋषिकेश और आसपास क्षेत्रों के शिवालयों में स्थानीय लोग जलाभिषेक कर सकेंगे।
आज इस वर्ष के सावन माह का पहला सोमवार है। आज के दिन प्रतिवर्ष सावन माह में लाखों की संख्या में शिवभक्त नीलकंठ मंदिर में जलाभिषेक करने के लिए पहुंचते हैं। ऋषिकेश समेत रामझूला और लक्ष्मणझूला क्षेत्र कांवड़ियों से भरा रहता है। मंदिर के मुख्य पुजारी शिवानंद गिरी महाराज ने बताया कि समिति ने कोरोना महामारी को देखते हुए मंदिर को न खोलने का निर्णय लिया है।
वीरभद्र और सोमेश्वर मंदिर में होंगे दर्शन
स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए वीरभद्र और सोमेश्वर मंदिर जलाभिषेक किया जा सकेगा। इस दौरान श्रद्धालुओं को सोशल डिस्टेंसिंग पालकर करना होगा। वहीं, चंद्रेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं का प्रवेश नहीं हो पाएगा। खासकर सोमवार के दिनों में मंदिर समिति के सदस्य ही मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे। मंदिर के महंत अखिलेश भारती ने बताया कि कोविड19 की गंभीरता को देखते हुए मंदिर को आमजन के प्रवेश के लिए बंद रखा गया है।
प्रशासन की ओर से जारी नियमों के अनुसार ही मंदिरों में श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे। मंदिर में दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को सोशल डिस्टेंसिंग आदि नियमों का पालन करना अति आवश्यक है।
वरुण चौधरी, एसडीएम ऋषिकेश।