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हरिद्वार: गाय-नंदी को पूजते तो हैं, उसकी दुर्दशा देखते नहीं, सड़कों पर भूख-प्यास से भटक रहे सैकड़ों पशु

Sun, 10 Oct 2021 01:01 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 10 Oct 2021 01:01 PM IST
सार

हरिद्वार नगर निगम निराश्रित पशुओं की सुध लेना ही भूल गया है। कांजी हाउस में पशुओं को भूख और बीमारी से मरने के लिए छोड़ दिया है। सड़कों पर घूमते मवेशी श्रद्धालुओं एवं स्थानीय लोगों की जान के लिए भी खतरा बन रहे हैं।

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haridwar news: worship cow and Nandi, but do not see their plight,
cow - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सनातन धर्म में गाय को माता का दर्जा है। गाय के अलावा नंदी का पूजन होता है। धर्मनगरी हरिद्वार की सड़कों पर हजारों गाय और नंदी बेसहारा भटक रहे हैं, वो किसी को नजर नहीं आती हैं। भूख से तड़पते पशु कहीं कूड़े के ढेर में खाना ढूंढते हैं तो कहीं वाहनों की चपेट में आने से जख्मी होकर दम तोड़ रहे हैं। गाय के नाम पर राजनीति करने वाले भी खामोश हैं।

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गाय के पूजन के साथ शुरू होती है आश्रमों में दिनचर्या
हरिद्वार नगर निगम निराश्रित पशुओं की सुध लेना ही भूल गया है। कांजी हाउस में पशुओं को भूख और बीमारी से मरने के लिए छोड़ दिया है। सड़कों पर घूमते मवेशी श्रद्धालुओं एवं स्थानीय लोगों की जान के लिए भी खतरा बन रहे हैं। धर्मनगरी में वैसे तो कई आश्रमों की गोशालाएं हैं। गाय के पूजन के साथ आश्रमों में दिनचर्या शुरू होती है। लेकिन आश्रम से बाहर सड़कों पर घूमने वाली गायें किसी को नजर नहीं आती हैं।
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श्राद्ध पक्ष में पितरों के पूजन के साथ गाय के ग्रास दिया जाता है। हरकी पैड़ी स्थित अपर रोड और शहर की सड़कों से लेकर हर गली मोहल्ले में गाय और नंदी नजर आते हैं। कूड़ाघर और डंपिंग जोन के आसपास इनका झुंड रहता है। अधिकतर जगहों पर गाय और नंदी जख्मी दिखाई देते हैं।

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नगर निगम को निराश्रित पशुओं की सुध नहीं

नगर निगम को निराश्रित पशुओं की सुध ही नहीं है। निगम का भगत सिंह चौक के पास कांजी हाउस बना है। इसी साल मई माह में कांजी हाउस का ताला खुला है। निगम के पास निराश्रित मवेशियों को पकड़ने के संसाधन ही नहीं, बल्कि पकड़े जाने के बाद उनको खिलाने के लिए चारे की व्यवस्था तक नहीं है।

मां गंगा सेवा समिति के पदाधिकारियों ने की पहल
कांजी हाउस की क्षमता 30 मवेशियों को रखने की है। पिछले कुछ महीनों में 25 गाय और नंदी पकड़कर रखे भी गए, लेकिन उनके लिए मात्र दस कुंतल भूसा रखा गया। भूख से बिलखते मवेशियों की जान बचाने के लिए मां गंगा सेवा समिति के पदाधिकारियों ने पहल की।

समिति अध्यक्ष अनिकेत गिरी बताते हैं, उनकी संस्था के 25 सदस्य हैं। जो आपस में पैसे एकत्र कर कांजी हाउस के पशुओं के लिए भूसा, हरा चारा, चोकर और बीमार पड़ने पर डॉक्टर एवं दवा की व्यवस्था करते हैं। अनिकेत गिरी बताते हैं, निराश्रिम मवेशियों को पकड़ने के लिए उनके पास संसाधन नहीं हैं।

सभी पशुओं को पकड़कर कांजी हाउस भी नहीं ला सकते हैं। सड़कों पर जख्मी गाय और नंदी को पकड़कर कांजी हाउस लाते हैं। उनका इलाज करवाते हैं और ठीक होने के बाद छोड़ देते हैं। वर्तमान में कांजी हाउस में 16 मवेशी हैं। एक मवेशी एक दिन में दस किलो भूसा खाता है।

मई माह में खुला कांजी हाउस का दरवाजा

कांजी हाउस में बिजली कनेक्शन करवाने के साथ वहां रखे जाने वाले मवेशियों के लिए चारा और इलाज की व्यवस्था दुरुस्त कराई जाएगी। शहर में घूमने वाले निराश्रित मवेशियों को भी पकड़कर कांजी हाउस में रखा जाएगा।
 - दयानंद सरस्वती, एमएनए हरिद्वार

सात गोशालाओं को सरकार दे रही अनुदान
पशुपालन विभाग गोशाला में गाय और नंदी के लिए अनुदान भी देता है। हरिद्वार में सात गोशालाएं अनुदान ले रही हैं। प्रति गाय या नंदी के लिए साढ़े बारह रुपये अनुदान दिया जाता है।

कांजी हाउस की सुध आज तक नहीं ली
नगर निगम का कांजी हाउस सालों से बंद पड़ा था। मां गंगा सेवा समिति की पहल पर निगम ने मई माह में कांजी हाउस तो खोल दिया, लेकिन उसकी सुध आज तक नहीं ली। समिति से जुड़े लोग ही सड़कों पर घूमते और जख्मी निराश्रित पशुओं को कांजी हाउस में पकड़कर लाते हैं।

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