कुंभ मेला 2021: पांच मार्च को धूमधाम से निकलेगी पंच दशनाम आह्वान अखाड़े की भव्य पेशवाई
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श्री पंच दशनाम आह्वान अखाड़े के राष्ट्रीय महामंत्री श्री महंत सत्य गिरि ने कहा है कि कुंभ मेला भारतीय संस्कृति की धरोहर और सनातन धर्म का महत्वपूर्ण पर्व है। उन्होंने कहा कि श्री पंच दशनाम आह्वान अखाड़े की धर्म ध्वजा तीन मार्च को फहराई जाएगी। पांच मार्च को धूमधाम के साथ भव्य पेशवाई निकाली जाएगी।
भूपतवाला स्थित अखाड़े में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए श्रीमहंत सत्य गिरि ने कहा कि कुंभ मेला दुनियाभर में किसी भी धार्मिक प्रयोजन के लिए भक्तों का सबसे बड़ा संग्रहण हैं। कुंभ मेले के दौरान सभी श्रद्धालु भक्तों को मां गंगा में स्नान कर स्वयं को पुण्य का भागी बनाना चाहिए। मुख्य संरक्षक श्रीमहंत नीलकंठ गिरि ने कहा कि कुंभ मेले के दौरान मां गंगा में स्नान करने वाले श्रद्धालु अनंत काल तक धन्य हो जाते हैं।
श्रीमहंत कर्णगिरि ने कहा कि प्रयागराज कुंभ के सफल आयोजन से पूरे विश्व में एक सकारात्मक धार्मिक संदेश का प्रचार हुआ। हरिद्वार कुंभ मेले की व्यवस्था भी उसी तर्ज पर होनी चाहिए। इस दौरान श्रीमहंत राजेंद्र भारती, श्रीमहंत राजेश गिरी, थानापति शंकर पुरी, थानापति विनोद गिरी, महंत इंद्र गिरी, महंत कैलाश पुरी आदि मौजूद रहे।
अखाड़ों को बांटी धर्म ध्वजा की लकड़ी
धर्म ध्वजा की लकड़ी पहुंचने के साथ अखाड़ों में कुंभ का आगाज हो गया है। शुक्रवार को मेलाधिकारी दीपक रावत ने बैरागी कैंप पहुंचकर संतों की मौजूदगी में अखाड़ों को लकड़ियों का आवंटन किया।
कुंभ में 13 अखाड़ों की ओर से धर्म ध्वजा स्थापित की जाती है। धर्म ध्वजा का सबसे अधिक महत्व है। मेला प्रशासन की ओर से बृहस्पतिवार रात देहरादून के छिद्दरवाला जंगल से धर्म ध्वजा की लकड़ी हरिद्वार लाई गई। शुक्रवार को मेलाधिकारी दीपक रावत बैरागी कैंप पहुंचे और संतों की मौजूदगी में लकड़ी का आवंटन किया। दिगंबर अखाड़े के सचिव प्रतिनिधि बाबा हठयोगी ने कहा कि सरकार और संतों के समन्वय से कुंभ मेला दिव्य और भव्य होगा।
अधिकारी दीपक रावत ने कहा कि धर्मध्वजा की लकड़ी को हरिद्वार लाना प्रशासन के लिए चुनौती था। पूर्व में ही संतों के साथ छिद्दरवाला के जंगल में लकड़ी का चयन कर पूजन हो गया था। वन विभाग की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उनका छपान और कटान के बाद अपर मेलाधिकारी हरवीर सिंह के नेतृत्व में लकड़ियों को हरिद्वार तक लाया गया। अखाड़े अपनी परंपराओं से अब धर्म ध्वज फहराएंगे।