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Kumbh Mela 2021: कोरोना के नए स्ट्रेन से बढ़ी सरकार की चिंता, भीड़ प्रबंधन पर टिका कुंभ का स्वरूप

Mon, 28 Dec 2020 02:06 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 28 Dec 2020 02:06 PM IST
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Haridwar Maha Kumbh Mela 2021 News: Format of Kumbh depend on crowd management
- फोटो : फाइल फोटो

हरिद्वार कुंभ का स्वरूप सरकार के स्तर से भीड़ प्रबंधन की कारगर योजना पर टिका है। भीड़ प्रबंधन के अनुसार ही सरकार कुंभ के आयोजन में लोगों को शामिल होने की छूट देगी। प्रशासन अच्छे से भीड़ प्रबंधन पर कामयाब हो जाता है तो मुख्य पर्व भी प्रतिबंध लगाए बिना हो सकते हैं। 

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सूत्रों के मुताबिक अभी तक सरकार को भीड़ प्रबंधन की किसी फुल प्रूफ योजना नहीं मिली है। इसी को देखते हुए अलग-अलग योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। इनमें कुछ योजनाएं धरातल पर उतरती हैं तो सरकार का काम आसान हो जाएगा और कुंभ को बड़े स्तर पर आयोजित होने देना संभव होगा। 
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यह भी पढ़ें: Kumb Mela 2021: कुंभ में भीड़ नियंत्रण की चुनौती को आसान बनाएगा ट्रैकर एप, आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिक ने किया तैयार
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अब ब्रिटेन का नया स्ट्रेन सामने आने से सरकार की चिंता बढ़ गई है। कुंभ में बड़ी संख्या में विदेशी भी शामिल होते हैं। ऐसे में कोई भी रियायत कोरोना संक्रमण की दर को बढ़ा सकती है।

भीड़ प्रबंधन की इन योजनाओं पर हो रहा है विचार

1. एप और नई तकनीक का सहारा
सरकार सर्विलांस सिस्टम को मजबूत कर लेती है तो एक ही जगह पर एकत्र होने वाली भीड़ से सोशल डिस्टेंस का पालन कराना आसान हो सकता है। आरोग्य सेतु एप की तरह ही कुंभ में शामिल होने वाले हर व्यक्ति तक अगर एप के जरिये एक्सेस हो सकती है तो यह कारगर प्लान हो सकता है। इसी लिए सरकार ने सर्विलांस पर खासा जोर दिया है और अन्य उच्च शोध संस्थानों से भी मदद मांगी है। 

2. कुंभ की अवधि को कम रखना
कुंभ एक आध्यात्मिक और सांस्कृति आयोजन है और इसमें महत्वपूर्ण तिथियों में देश-विदेश से लोग पहुंचते हैं। कुंभ की अवधि को कम रखा जाता है तो इससे कुंभ के स्वरूप पर फर्क नहीं पड़ता, लेकिन आने वाले लोगों की संख्या जरूर कम हो सकती है। 

3. अन्य राज्य से आने वाले लोगों की जांच
सरकार अन्य राज्यों से कह सकती है कि वे जांच कराकर और पास व्यवस्था आदि के जरिए ही लोगों को कुंभ में शामिल होने को कहे। इसी के तहत सरकार ने कहा था कि आने वालों से कोविड निगेटिव सर्टिफिकेट लिया जाएगा। यह भी भीड़ प्रबंधन का हिस्सा है।

4. आवागमन के संसाधनों को सीमित करना
कुंभ में सरकार की ओर से स्पेशल ट्रेन, बस आदि की व्यवस्था की जाती है ताकि ज्यादा लोग आसानी से आयोजन में शामिल हो सकें। इस बार इसकी व्यवस्था न होने के आसार हैं। इस तरह से भी लोगों की संख्या में कमी आ सकती है।

पहली प्राथमिकता उत्तराखंड में कुंभ के आयोजन को दी जाए

कोरोना वैक्सीन के लिए सरकार केंद्र से कह चुकी है कि पहली प्राथमिकता उत्तराखंड में कुंभ के आयोजन को दी जाए। इस वैक्सीन पर भी निर्भर करेगा कि कुंभ का स्वरूप क्या रहेगा।

कुंभ में सबसे बड़ी समस्या भीड़ प्रबंधन की है और इसको लेकर कई स्तर पर विचार किया जा रहा है। ब्रिटेन का नया स्ट्रेन भी सामने आया है और इससे सरकार की चिंता बढ़ गई है। आगे आने वाले समय में संक्रमण की रफ्तार पर निर्भर करता है कि किस योजना को अपनाया जाएगा। हालात सामान्य रहते हैं तो कुंभ अपने भव्य स्वरूप में होगा और इसकी तैयारी सरकार के स्तर से की जा रही है। 
-मदन कौशिक, शहरी विकास मंत्री, उत्तराखंड 

केदारनाथ की आपदा के बाद प्रदेश सरकार के सामने भी यह चुनौती थी कि चार धाम यात्रा शुरू की जाए या नहीं। उस समय तत्कालीन सरकार ने मन बना लिया था तो राह भी बन गई थी। मुसीबत यह है कि सरकार इस समय तय ही नहीं कर पा रही है कि उसे करना क्या है। सरकार तय करे तो बाकी लोग भी साथ देंगे। संतों का साथ भी मिलेगा।
-हरीश रावत, पूर्व सीएम, उत्तराखंड

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