विवाद के कारण हरिद्वार का बड़ा आश्रम हुआ सील
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लगातार हो रहे विवाद के कारण पर जिला प्रशासन ने हरिद्वार के एक बड़े को आश्रम सील कर दिया है।
शहर के बीचोबीच पांच अरब की इस विवादित संपत्ति में 80 कमरे व इतनी ही दुकानें हैं। यहां रह रहे एक संत समेत 25 लोगों को सामान समेत खदेड़ दिया गया।
इस दौरान पुलिस और काबिज लोगों में जमकर नोकझोंक हुई। पांच जनवरी वर्ष 2013 को आश्रम के प्रमुख महंत स्वामी हंसप्रकाश ब्रह्मलीन हो गए थे।
दोनों पक्षों में आए दिन हो रही थी मारपीट
इसके बाद से आश्रम पर स्वामित्व के लिए विवाद चल रहा है। दिल्ली एवं सोनीपत (हरियाणा) के कुछ लोग खुद को ट्रस्टी बताकर आश्रम में डटे थे।
दूसरे गुट के स्वामी रूपेंद्र भी ब्रह्मलीन संत का शिष्य होने का दावा करते हुए आश्रम में काबिज थे। आए दिन दोनों पक्षों में मारपीट और तनातनी हो रही थी।
इस पर पुलिस सख्त हुई और इसको सील करने के लिए जिला प्रशासन से कहा था।
हरकत में आया जिला प्रशासन
हाईकोर्ट के अधिवक्ता राजेश रस्तोगी की याचिका पर विवादित संपत्ति के लिए रिसीवर नियुक्त करने का आदेश होने पर मंगलवार को जिला प्रशासन हरकत में आया और सुबह करीब 50 पुलिसकर्मी आश्रम पहुंचे।
यह देख आश्रम में रह रहे लोगों में खलबली मच गई। प्रशासनिक टीम ने आठ परिवारों और संत रूपेंद्र से आश्रम खाली करने को कहा तो जमकर नोकझोंक भी हुई।
इस पर पुलिस टीम ने कमरों में सील लगा इन लोगों को सामान समेट कर खदेड़ दिया। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मुख्यद्वार शाम चार बजे तक बंद रखा।
सीओ सदर ने बताया कि नायब तहसीलदार एवं कोतवाली प्रभारी ज्वालापुर पदेन रिसीवर होंगे। पूरी संपत्ति की कीमत करीब पांच अरब आंकी गई है।
आश्रम में 80 दुकानें भी हैं। इससे होने वाली आमदनी से आश्रम की देखरेख की जाएगी।