हरिद्वार भूमि घोटाला: सरकार का बड़ा एक्शन; पूर्व MNA की बर्खास्तगी व तत्कालीन DM पर मेजर पनिशमेंट की संस्तुति
हरिद्वार नगर निगम ने गांव सराय में स्थित कूड़ा निस्तारण केंद्र के विस्तार के लिए लगभग 33 बीघा भूमि 54 करोड़ रुपये में खरीदी थी। आरोप है कि इस खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं बरती गईं।
विस्तार
हरिद्वार नगर निगम में हुए 54 करोड़ के भूमि खरीद घोटाले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़ी कार्रवाई की है। तत्कालीन नगर आयुक्त आईएएस वरुण चौधरी के खिलाफ बर्खास्तगी और तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह को दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) की संस्तुति का फैसला लिया गया है। इसकी सिफारिश कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को भेजी जा रही है। वहीं, तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह की परनिंदा प्रविष्टि व तीन वेतनवृद्धि रोकने का फैसला लिया गया है।
नगर निगम हरिद्वार ने ग्राम सराय के पास जो 2.3070 हेक्टेयर जमीन खरीदी थीं, उसका लैंड यूज कृषि था। अधिकारियों ने इसे खरीदने से पहले लैंडयूज बदलकर कॉमर्शियल कराया। इसके बाद नगर निगम हरिद्वार ने इस जमीन को 54 करोड़ रुपये में खरीदा। खास बात यह भी है कि जमीन किस मकसद से खरीदी गई थी, यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया था। मामला संज्ञान में आते ही मुख्यमंत्री ने तत्कालीन डीएम कर्मेंद्र सिंह, नगर आयुक्त वरुण चौधरी, एसडीएम अजयवीर सिंह समेत करीब नौ अफसरों को निलंबित कर दिया था। मामले की जांच बैठा दी गई थी।
अब सरकार ने प्रकरण में तत्कालीन नगर आयुक्त हरिद्वार वरुण को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने की सिफारिश की है। तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह को अपने पदीय दायित्वों एवं कर्तव्यों के समुचित निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके विरुद्ध दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है।
दोनों अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को सिफारिश भेजी जा रही है। तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह की परनिंदा प्रविष्टि (लघु शास्ति) व तीन वेतनवृद्धि रोकने का फैसला लिया गया है।
क्या है मामला
हरिद्वार नगर निगम ने गांव सराय में स्थित कूड़ा निस्तारण केंद्र के विस्तार के लिए लगभग 33 बीघा भूमि 54 करोड़ रुपये में खरीदी थी। आरोप है कि इस खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं बरती गईं। मुख्य आरोप यह है कि भूमि का लैंड यूज कृषि से बदलकर व्यावसायिक किया गया, जिससे इसका सर्किल रेट 6000 रुपये प्रति वर्ग मीटर से बढ़कर 25000 रुपये प्रति वर्ग मीटर हो गया। इस हेरफेर से करोड़ों का घोटाला हुआ है।आपराधिक षड्यंत्र, 10 पर दर्ज होगी प्राथमिकी
विजिलेंस की विस्तृत जांच में आपराधिक षड्यंत्र एवं धोखाधड़ी के माध्यम से भूमि क्रय-विक्रय कर नगर निगम को आर्थिक क्षति पहुंचाने के आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए गए हैं। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता वाली राज्य सतर्कता समिति की संस्तुति पर मामले में संलिप्त अधिकारी-कर्मचारियों और भूमि विक्रेताओं के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का मुख्यमंत्री धामी ने अनुमोदन दे दिया है। जांच में दोषी पाए गए व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी, तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त रवींद्र कुमार दयाल, तत्कालीन कर अधीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट, तत्कालीन सहायक अभियंता एवं प्रभारी अधिशासी अभियंता आनंद सिंह मिश्रा, तत्कालीन संपत्ति लिपिक वेदपाल और तत्कालीन मानचित्रकार दिनेश कांडपाल के अलावा भूमि विक्रेता एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों सुमन देवी, जितेंद्र कुमार, अभिषेक यादव और सुजीत कुमार सिंह के विरुद्ध भी प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।
भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा। शासन-प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित सर्वोपरि है। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी।
- पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.