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Uttarakhand: बढ़ती गर्मी का असर, टिहरी बांध का जलस्तर न्यूनतम स्तर पर पहुंचा, बिजली उत्पादन पर पड़ा प्रभाव

Fri, 19 Jun 2026 12:58 PM IST
Renu Saklani संवाद न्यूज एजेंसी, नई टिहरी।
संवाद न्यूज एजेंसी, नई टिहरी। Published by: Renu Saklani Updated Fri, 19 Jun 2026 12:58 PM IST
सार

टिहरी बांध का जलस्तर न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। इसका असर बिजली उत्पादन पर पड़ने लगा है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, चंडीगढ़ आदि राज्यों को सिंचाई और पीने के लिए पानी मुहैया करवाना बड़ी चुनौती बन रहा है।

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Tehri Dam water level at minimum; power generation affected Uttarakhand news in hindi
टिहरी बांध - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

इन दिनों बढ़ती गर्मी का असर अब टिहरी बांध पर दिखने लगा है। बारिश नहीं होने और मौसम के चढ़ते पारे के कारण टिहरी बांध की झील का जलस्तर न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। जिसका प्रभाव सीधे तौर पर विद्युत उत्पादन पर भी पड़ रहा है। झील में पानी कम होने से टिहरी बांध से लगभग 500 और कोटेश्वर बांध से 200 मेगावाट ही विद्युत उत्पादन हो पा रहा है जबकि सामान्य दिनों में टीएचडीसी 1000 से लेकर 1200 मेगावाट विद्युत उत्पादन करता है।

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झील का जलस्तर घटकर आरएल (रीवर लेवल) 742.79 मीटर तक पहुंच गया है। 42 वर्ग किलोमीटर में फैली झील का जलस्तर इन दिनों 88 मीटर कम हो गया है। सामान्य दिनों में जलस्तर अधिकतम आरएल 830 मीटर रहता है लेकिन बारिश कम होने के कारण जलस्तर घटकर न्यूनतम स्तर आरएल 742.79 मीटर पहुंच गया है। बारिश कम होने के कारण भागीरथी नदी से इन दिनों 126 क्यूमेक्स, भिलंगना से 55 क्यूमेक्स और सहायक नदियों से केवल 54.32 क्यूमेक्स पानी आ रहा है।
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पानी मुहैया करवाना बड़ी चुनौती
झील से 140 क्यूमेक्स पानी सिंचाई और पीने के लिए छोड़ा जा रहा है। जलस्तर कम होने से विद्युत उत्पादन भी प्रभावित हो गया है। वर्तमान में टीएचडीसी टिहरी बांध से 500 और कोटेश्वर बांध से 200 मेगावाट ही विद्युत उत्पादन कर पा रही है। टीएचडीसी इन दिनों तीन घंटे सुबह और तीन घंटे शाम को चार के बजाए तीन टरबाइन ही चला रही है।

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बारिश के दिनों में जब झील अधिकतम आरएल 830 मीटर भरी रहती है, तो विद्युत उत्पादन भी 1000 से 1200 मेगावाट होता है। गर्मी शुरू होते ही 30 मार्च से 30 जून तक टीएचडीसी के सामने देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने से लेकर उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, चंडीगढ़ आदि राज्यों को सिंचाई और पीने के लिए पानी मुहैया करवाना बड़ी चुनौती रहती है।

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गर्मी के दिनों में बारिश कम होने से झील का जलस्तर घटना स्वाभाविक है जिसका असर विद्युत उत्पादन पर भी पड़ रहा है। मानसून सीजन शुरू होने के बाद जलस्तर भी बढ़ने लगता है। इससे विद्युत उत्पाद भी पर्याप्त मात्रा में होता है। इन दिनों झील का जलस्तर न्यूनतम आरएल 742.79 मीटर पहुंच गया है, जिससे विद्युत उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। -आरआर सेमवाल, मुख्य महाप्रबंधक टिहरी कॉम्प्लेक्स टीएचडीसी


 

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