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कुंभ 2021 : जूना सहित कई अखाड़ों ने की कुंभ विसर्जन की घोषणा, सरकार की एसओपी में मेला अवधि में कोई बदलाव नहीं

Sat, 17 Apr 2021 09:28 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 17 Apr 2021 09:28 PM IST
सार

जूना के सहयोगी अग्नि, आह्वान और किन्नर अखाड़ा भी इसमें शामिल हैं। पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी और श्री तपोनिधि आनंद अखाड़ा ने भी शनिवार से कुंभ विसर्जन कर दिया है।

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Haridwar Kumbh Mela 2021 : some akharas does kumbh immersion, Government did not change SOP
हरिद्वार कुंभ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद नागा संन्यासियों के सबसे बड़े श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा ने शनिवार देर शाम कुंभ विसर्जन की घोषणा कर दी। अखाड़ा पदाधिकारियों एवं संतों की आपात बैठक में कोविड के बढ़ते हुए खतरे को देखते हुए यह निर्णय लिया गया।

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जूना के सहयोगी अग्नि, आह्वान और किन्नर अखाड़ा भी इसमें शामिल हैं। पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी और श्री तपोनिधि आनंद अखाड़ा ने भी शनिवार से कुंभ विसर्जन कर दिया है। विधिवत समापन 30 अप्रैल को होगा। 30 अप्रैल कुंभ अवधि तक सात अखाड़ों में आयोजन होते रहेंगे। 
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महाकुंभ में भीड़ के चलते कोरोना फैलने से सवाल उठने लगे थे। 12 और 14 अप्रैल के स्नान में 39 लाख से अधिक श्रद्धालुओं और संतों की डुबकी लगाए जाने के बाद हरिद्वार में कोरोना तेजी से फैल गया है। मरीजों के साथ मृतकों की संख्या भी बढ़ने लगी है।

प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने अवधेशानंद गिरी से टेलीफोन पर वार्ता की

कोविड के प्रसार होने से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने जूना पीठाधीश्वर अवधेशानंद गिरी से टेलीफोन पर वार्ता की। कुंभ मेला प्रतीकात्मक करने की अपील की। जिसके बाद जूना अखाड़ा में शनिवार शाम आपात बैठक बुलाई गई।

जिसमें आपसी सहमति से कुंभ मेला के विसर्जन की घोषणा हुई। अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत प्रेमगिरि की अध्यक्षता एवं अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरि के संचालन में वैश्विक यह फैसला लिया गया। 

संतों ने कहा कि कोरोना के बढ़ते प्रकोप से मेले में सामुदायिक संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ रही है। लिहाजा, सभी की सुरक्षा के लिए मेला विसर्जन आवश्यक हो गया है। श्रीमहंत हरिगिरि ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अपील के बाद अखाड़ा ने मेले में समस्त देवी-देवताओं जिनका आहवान किया था, उनका पूजा-अर्चना कर विर्सजन कर दिया गया।

श्रीमहंत हरिगिरी ने कहा कि देवी देवताओं से कोरोना महामारी से पूरे विश्व को मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की। श्रीमहंत प्रेम गिरि ने कहा देवी देवताओं के विसर्जन के साथ ही कुंभ मेला विसर्जित हो गया है। 

जूना अखाड़ा के घोषणा से उनके सहयोगी अग्नि अखाड़ा, आह्वान अखाड़ा और किन्नर अखाड़ा ( अखाड़ा परिषद से मान्य नहीं) का भी कुंभ विर्जसन हो गया है। श्री निरंजनी और आनंद अखाड़ा पहले ही 17 अप्रैल से कुंभ मेला विसर्जन की घोषणा कर चुके हैं। शनिवार को छह अखाड़ों के कुंभ विसर्जन से अघोषित रूप से कुंभ का समापन भी हो गया।

हरिद्वार महाकुंभ से कोई छेड़छाड़ नहीं 

प्रदेश सरकार ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि हरिद्वार महाकुंभ का न तो क्षेत्र घटेगा और न ही समय कम किया जाएगा। शनिवार को सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से संतों की ओर से की गई अपील के बाद यह कयास लगने लगे थे कि महाकुंभ को सीमित किया जाएगा।

मुख्य सचिव ओमप्रकाश की ओर से शनिवार को जारी की गई मानक प्रचालन प्रक्रिया या एसओपी में यह साफ कर दिया गया है कि हरिद्वार महाकुंभ मेला क्षेत्र में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है।

हरिद्वार कुंभ मेला की अधिसूचना प्रदेश सरकार की ओर से फरवरी माह में जारी की गई थी। इसमें चार जिलों के कुछ-कुछ हिस्सों को लेकर मेला क्षेत्र घोषित किया गया था और मेला अवधि एक अप्रैल से 30 अप्रैल तक की घोषित की गई थी।

शनिवार को जारी एसओपी में यह साफ कर दिया गया है कि इस अधिसूचना में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

श्री निरंजनी और आनंद अखाड़े की छावनियां खाली

कोरोना महामारी से बचाव के लिए कुंभ विसर्जन की घोषणा के बाद श्री निरंजनी और आनंद अखाड़े की छावनियां शनिवार को खाली हो गईं। कल्पवास पर आए संत छावनियां छोड़कर अपने-अपने प्रदेशों और शहरों में रवाना हो गए। जूना और उसके सहयोगी अखाड़ों की छावनियां भी रविवार से खाली होनी शुरू हो जाएंगी। 

श्री निरंजनी अखाड़े के सचिव एवं मेला प्रभारी श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने बताया कि उनकी ओर से 17 अप्रैल से कुंभ विसर्जन की घोषणा की गई थी। शनिवार सुबह आठ बजे से अखाड़े के पास लगी छावनियां खाली होनी शुरू हो गईं। श्रीमहंत रविंद पुरी खुद संक्रमित हैं और अखाड़े में आइसोलेट हैं। उन्होंने बताया कि शनिवार को हजारों संत अपने शहरों को लौट गए।

करीब 500 संत अखाड़े में प्रवेश कर गए हैं। संतों के साथ भंडारी, पुजारी और उनके भक्त भी लौट गए हैं। उधर, जूना अखाड़े की घोषणा के बाद सहयोगी अग्नि, आह्वान और किन्नर अखाड़े की छावनियां भी रविवार से खाली होनी शुरू हो जाएंगी। जूना अखाड़े के मीडिया प्रवक्ता गोपाल रावत ने बताया कि रविवार से बाहर से आए संत रवाना होंगे। अखाड़ों से जुड़े संत अखाड़ों में आ जाएंगे। 

घाटों पर कम हुई श्रद्धालुओं की भीड़ 

कोविड के बढ़ते संक्रमण लगातार लागू हो रहीं पाबंदियों को देखते हुए कुंभनगरी के घाटों पर भीड़भाड़ कम होने लगी है। शनिवार को हरकी पैड़ी समेत अन्य घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ काफी कम रही। हरकी पैड़ी छोड़ बाकी घाटों पर श्रद्धालु नजर ही नहीं आए। आज रविवार को कर्फ्यू है। सोमवार से भीड़ और कम होने की उम्मीद है।

बैरागी कैंप में पांच संत और अनुयासी मिले संक्रमित

किशोर न्यायालय के 34 वर्षीय पीठासीन अधिकारी सहित हरिद्वार जिले में 743 नए कोविड संक्रमित मिले हैं। वहीं बैरागी कैंप में पांच संत और अनुयायी कोविड संक्रमित पाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अखाड़ों और आश्रमों में 260 संतों के आरटी-पीसीआर जांच के लिए सैंपल लिए हैं।

हरिद्वार में कोविड की दूसरी लहर का कहर जारी है। जिले में 743 नए कोविड पॉजिटिव मिले हैं। इनमें 175 श्रद्धालु भी शामिल हैं। पॉश कॉलोनी शिवालिक नगर में सबसे अधिक 35 लोग संक्रमित पाए गए हैं। भेल में 24, पतंजलि योगपीठ में 10, आईआईटी रुड़की में पांच कोविड संक्रमित मिले हैं।

सीएमओ डा. एसके झा ने बताया कि जिले में 14459 लोगों की रैडम एंटीजन जांच की गई। वहीं 5606 लोगों के आरटी-पीसीआर जांच के लिए सैंपल लिए गए हैं। जबकि 87 लोगों की ट्रूनेट जांच की गई है। इनमें से 568 लोग कोविड संक्रमित मिले हैं।

उन्होंने बताया कि 115 संक्रमित स्वस्थ हुए हैं। वर्तमान में जिले में कोविड संक्रमितों की संख्या 1316 है। वहीं मेलाधिकारी स्वास्थ्य डा. अर्जुन सिंह सेंगर बताया कि मेला क्षेत्र और राज्यसीमा पर 10351 लोगों की रैंडम एंटीजन जांच और 3446 लोगों के आरटी-पीसीआर जांच के लिए सैंपल लिए गए हैं। इनमें से 175 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। 

इन अखाड़ों, आश्रमों में लिए गए सैंपल

अखिल भारतीय श्री पंच दिंगबर अणि में 89, श्री पंचायती अटल अखाड़ा में 45, बाबा हठयोगी आश्रम में 40, श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा में 39, दक्षिणेश्वर काली मंदिर में 32, श्री पंचायती निर्मल अखाड़ा में 11, उदासीन अखाड़ा में चार संतों की कोविड आरटी-पीसीआर जांच के लिए स्वैब सैंपल लिए गए।

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