Haridwar Kumbh 2021: शाही स्नान के दिन हरिद्वार में वीआईपी मेहमानों की एंट्री रहेगी बैन
- डीजीपी अशोक कुमार ने दी जानकारी, शाही स्नान से पहले जारी किया जाएगा पत्र
- वीआईपी मूवमेंट में भीड़ नियंत्रण से हट जाता है पुलिस का ध्यान
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महाकुंभ में शाही स्नान के दिन वीआईपी मेहमानों के आने पर रोक रहेगी। हालांकि, यदि वीआईपी आना चाहते हैं तो वे साधारण श्रद्धालुओं के तौर पर शामिल हो सकते हैं। ऐसा महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए किया जा रहा है।
बता दें कि इस बार महाकुंभ पर सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक कड़ी रहेगी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए जमीन से लेकर आकाश में ड्रोन कैमरों से भी नजर रखी जाएगी। साथ ही श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो इसके लिए वीआईपी मूवमेंट पर शाही स्नान के दिन रोक लगाई जाएगी।
डीजीपी ने बताया कि इस संबंध में शाही स्नान से पहले ही कुंभ मेला प्रशासन को निर्देशित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि वीआईपी यदि कुंभ में आना चाहते हैं तो वे एक साधारण श्रद्धालु की भांति ही आ सकते हैं।
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वीआईपी के लिए अलग से पुलिस की व्यवस्था नहीं की जा सकेगी। क्योंकि, पूर्व में ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनमें वीआईपी को सुरक्षा देने के चलते भीड़ नियंत्रण में परेशानी आई है। डीजीपी ने बताया कि इस दौरान लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी। समय-समय पर इस संबंध में बैठक आयोजित कर अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए जा रहे हैं।
भव्यता के साथ होगा कुंभ मेला : कैलाशानंद गिरि
निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि ने कहा कि महाकुंभ 2021 दिव्य और भव्य होगा। महाकुंभ के दौरान पूर्व की भांति ही अखाड़ों की छावनियां स्थापित की जाएंगी। महामंडलेश्वर नगर बसाने के साथ सभी शिविर भी लगाए जाएंगे।
आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि ने श्री दक्षिण काली मंदिर में संतों की बैठक में कहा कि मेला अधिकारी दीपक रावत से कुंभ तैयारियों को लेकर उनकी वार्ता हुई है। आचार्य महामंडलेश्वर ने कहा कि पूर्व में संपन्न हुए कुंभ मेलों की भांति 2021 में भी पंडाल, शिविर और अखाड़ों की छावनी लगेंगी।
सभी संतों को पूर्व की भांति सरकारी सुविधाएं और पंडाल बनाने की अनुमति मिल जाएगी। कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए 2021 कुंभ को पूर्व की भांति दिव्य व भव्य रूप से संपन्न कराया जाएगा।
स्वामी आनंद गिरि ने कहा कि महाकुंभ पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति व सनातन धर्म की पहचान को व्यक्त करने वाला महापर्व है। इस दौरान स्वामी राधाकांताचार्य, आचार्य पवनदत्त मिश्र, स्वामी अनुरागी, अवंतकानंद ब्रह्मचारी, कृष्णानंद ब्रह्मचारी, बालमुकुंद ब्रह्मचारी, पंडित प्रमोद पांडे आदि मौजूद रहे।