हरिद्वार: कैलाशानंद ब्रह्मचारी अब बने कैलाशानंद गिरि, मकर संक्रांति पर होगा पट्टाभिषेक
- जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने शुक्रवार को अपना शिष्य बनाकर दिया आशीर्वाद
- श्रद्धालुओं ने धूमधाम से मनाया उनका जन्मदिन और संन्यास दिवस
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देशभर से आए श्रद्धालुओं ने कैलाशानंद गिरि के जन्मदिन के साथ ही उनका पहला संन्यासी दिवस भव्य रूप में मनाया। अग्नि अखाड़े के महामंडलेश्वर एवं दक्षिण काली पीठाधीश्वर कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज से श्री पंचायती निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर की दीक्षा ग्रहण कर ली है। इसके साथ ही वे कैलाशानंद गिरि के नाम से जाने जाएंगे।
शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने वर्ष 2008 में उनसे दीक्षा लेने के लिए कहा था। तब उन्होंने कहा था कि समय आने यह सब होगा। शुक्रवार को कैलाशानंद के जन्मदिन के साथ ही उनके संन्यास के पहले दिन पर शंकराचार्य ने उन्हें अपना शिष्य बनाते हुए आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि संन्यास दीक्षा लेने के साथ कैलाशानंद ब्रह्मचारी अब संन्यासी बन गए हैं।
अब उन्हें कैलाशानंद ब्रह्मचारी नहीं कैलाशानंद गिरि के नाम से ही जाना जाएगा। श्री पंचायती निरंजनी अखाड़ा के सचिव एवं मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री महंत रविंद्रपुरी ने कहा कि निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर के पद पर कैलाशानंद गिरि आसीन होंगे। उनका पट्टाभिषेक 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन होगा। कैलाशानंद गिरि ने जगद्गुरु शंकराचार्य से दीक्षा ली है।
परंपराएं पूरी करने के बाद कैलाशानंद गिरि को दीक्षा दी गई
अब निरंजनी अखाड़े के नागा संन्यासी और अन्य संतों को आचार्य महामंडलेश्वर के रूप में कैलाशानंद गिरि दीक्षा देंगे। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि ने कहा कि ईष्ट देव भगवान कार्तिकेय के बाद अखाड़ों में आचार्य महामंडलेश्वर सबसे बड़े होते हैं। सभी परंपराएं पूरी करने के बाद कैलाशानंद गिरि को दीक्षा दी गई। मौके पर श्रीमहंत राम रतन गिरि, महंत राधेश्याम गिरि, महंत मनीष भारती, महंत नरेश गिरि महाराज, महंत सुखदेव पुरी महाराज, महंत नीलकंठ गिरि, महंत गंगा गिरि, रत्नगिरी महाराज, महंत अनुज पुरी, महंत राजेंद्र भारती मौजूद थे।
विद्वान व्यक्ति में होता है सेवा का भाव : कैलाशानांद
कैलाशानंद गिरि ने कहा कि संन्यास लेने के लिए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि, महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि और श्रीपंचायती निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने उन्हें प्रेरणा दी। उन्होंने ही कहा था कि आपको आचार्य महामंडलेश्वर बनना है। उन्होंने कहा कि विद्वान व्यक्ति वही होता है, जिसमें सेवा का भाव हो। कैलाशानंद ने कहा कि वह 45वें वर्ष में प्रवेश कर गए हैं। अग्नि अखाड़े के बाद उनका जीवन श्री पंचायती निरंजनी अखाड़े के लिए रहेगा। जब भी अग्नि अखाड़े को जरूरत होगी, वह हर सेवा के लिए तैयार रहेंगे।