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पेड़-पौधों को राखी बांध कर मनाया गया हरेला
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रक्षाबंधन पर्व पर पेड़ो को बचाने हेतु सकल्प के तहत पेड़ो पर राखी बांधती धाद संस्था के सदस्य।---संव
- फोटो : DEHRADUN
अमर उजाला फाउंडेशन और धाद सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्था की ओर से आयोजित हरेला घी संग्रांद के 28वें दिन बृहस्पतिवार को स्मृतिवन माल देवता में लगाए गए पौधों को राखी बांधने के साथ संपन्न हुआ।
रक्षा बंधन पर पेड़-पौधों की रक्षा और देखरेख के लिए सभी से पेड़-पौधों को राखी बांधने की अपील की गई थी। स्मृतिवन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी मौजूद थी। महिलाओं ने गत वर्षों में लगाए गए पौधों को राखी बांधी। स्मृतिवन की सचिव नीना रावत ने कहा कि हरेला में लगाया गया स्मृतिवन आज लोगों के सहभागिता के साथ एक सघन वन के रूप में विकसित हो रहा है। संयोजक वीरेंद्र खंडूड़ी ने बताया कि स्मृति वन में पौधों को बचाने के लिए रक्षा सूत्र बांधे। धाद के अध्यक्ष लोकेश नवानी ने कहा कि पेड़ों के साथ भावनात्मक संबंध विकसित करना जरूरी है।
सुरभी रावत ने कहा कि नई पीढ़ी को वन लगाने की जरूरत ज्यादा है। फंची के संयोजक किशन सिंह ने कहा कि पेड़ों को लगाने और उनके संरक्षण के उत्सव हरेला का समापन अब हरियाली और पहाड़ के अन्न और भोजन के साथ 17 अगस्त को होगा। धर्म सिंह राणा ने हरेला पर आधारित एक गीत सुनाया। सेवानिवृत्त शिक्षक आशा डोभाल ने कहा कि आज के पर्व की खास बात यह है कि आज हमने अपने भाई के साथ-साथ पेड़ों को भी राखी बांधी। इस मौके पर शोभा अमोली, तन्मय ममगाईं, सुरेंद्र अमोली, अनुव्रत नवानी, अंशुल वर्मा, सोना वर्मा, चंद्रकला शुक्ला आदि मौजूद रहे।
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रक्षा बंधन पर पेड़-पौधों की रक्षा और देखरेख के लिए सभी से पेड़-पौधों को राखी बांधने की अपील की गई थी। स्मृतिवन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी मौजूद थी। महिलाओं ने गत वर्षों में लगाए गए पौधों को राखी बांधी। स्मृतिवन की सचिव नीना रावत ने कहा कि हरेला में लगाया गया स्मृतिवन आज लोगों के सहभागिता के साथ एक सघन वन के रूप में विकसित हो रहा है। संयोजक वीरेंद्र खंडूड़ी ने बताया कि स्मृति वन में पौधों को बचाने के लिए रक्षा सूत्र बांधे। धाद के अध्यक्ष लोकेश नवानी ने कहा कि पेड़ों के साथ भावनात्मक संबंध विकसित करना जरूरी है।
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सुरभी रावत ने कहा कि नई पीढ़ी को वन लगाने की जरूरत ज्यादा है। फंची के संयोजक किशन सिंह ने कहा कि पेड़ों को लगाने और उनके संरक्षण के उत्सव हरेला का समापन अब हरियाली और पहाड़ के अन्न और भोजन के साथ 17 अगस्त को होगा। धर्म सिंह राणा ने हरेला पर आधारित एक गीत सुनाया। सेवानिवृत्त शिक्षक आशा डोभाल ने कहा कि आज के पर्व की खास बात यह है कि आज हमने अपने भाई के साथ-साथ पेड़ों को भी राखी बांधी। इस मौके पर शोभा अमोली, तन्मय ममगाईं, सुरेंद्र अमोली, अनुव्रत नवानी, अंशुल वर्मा, सोना वर्मा, चंद्रकला शुक्ला आदि मौजूद रहे।
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