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एनडी और गुलाब सिंह का रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाए हरबंस कपूर

Tue, 14 Dec 2021 12:09 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 14 Dec 2021 12:09 AM IST
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Harbans Kapoor could not break the record of ND and Gulab Singh
विधायक हरबंस कपूर का फाइल फोटो
वरिष्ठ विधायक हरबंस कपूर सबसे ज्यादा बार विधानसभा पहुंचने के दिग्गज नारायण दत्त तिवारी और गुलाब सिंह का रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाए। तीनों ही दिग्गजों के नाम आठ-आठ बार विधायक रहने का रिकॉर्ड रहा। उनके पास अभी नया रिकॉर्ड बनाने का मौका था। लेकिन उससे पहले ही वो दुनिया से विदा हो गए।
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1984 में अपना पहला विधानसभा चुनाव हारने के बाद हरबंस कपूर ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। तब देश और राज्य में भाजपा की स्थिति बहुत ज्यादा बेहतर नहीं थी। इसके कारण कपूर को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। लेकिन वो लगातार जनता के बीच रहकर काम करते रहे। संगठन और व्यक्तिगत स्तर पर वह लगातार जनता से जुड़े रहे। इसी का नतीजा रहा कि 1989 के चुनाव में उन्होंने बड़े अंतर से जीत हासिल की। उसके बाद 2017 तक उन्होंने रिकॉर्ड आठ विधानसभा चुनाव जीते। अभी उनके पास नौवीं जीत हासिल करने का पूरा मौका था। लेकिन ईश्वर को शायद कुछ और ही मंजूर था।
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कई जिम्मेदारियों का किया निर्वहन
हरबंस कपूर हमेशा लो प्रोफाइल रहकर काम करते रहे। उन्होंने संगठन और सरकार में कई जिम्मेदारियों को संभाला। वकालत पेशे से अपने करियर की शुरूआत करने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा। पहली हार के बाद पांच वर्षों की मेहनत से उन्होंने अपने लिए ऐसा जनाधार खड़ा किया, जिसने उन्हें बड़ी जीत दिलाई। वह यूपी सरकार में ग्राम विकास राज्य मंत्री, श्रम एवं रोजगार मंत्री, याचिका समिति, लोक लेखा समिति, आवास समिति एवं आश्वासन समिति सहित विभिन्न समितियों के सदस्य रहे। उत्तराखंड में पहली सरकार में वह शहरी विकास, श्रम एवं रोजगार मंत्री रहे। 2007 से 12 तक वह विधानसभा अध्यक्ष रहे। यूपी के समय वह टिहरी, उत्तरकाशी और चमोली के जिला प्रभारी भी रहे।
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राज्य आंदोलन में भी निभाई अहम भूमिका
उन्होंने राज्य आंदोलन में भी सक्रिय रहकर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन किया। उन्हें उत्तरांचल संघर्ष समिति में उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई। राज्य जन्मभूमि आंदोलन के दौरान वह तीन माह तक अंडर ग्राउंड रहे और 23 दिन कांसखेत पौड़ी अस्थाई जेल में भी बंद रहे। इस दौरान वह उन्नाव जेल में भी बंद रहे। इसके अलावा भी राज्य आंदोलन के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में उनकी सक्रियता रही।
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