खुलासाः हरक ने कर दिया था काम करने से इनकार
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अफसरों की मनमानी से नाराज कृषि मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने अगस्त में विभाग की जिम्मेदारी से हाथ खड़े कर दिए थे। यह टिप्पणी उन्होंने बाकायदा एक फाइल पर कड़े शब्दों में लिख दी थी।
कृषि मंत्री की नाराजगी खुलकर सामने आने से शासन में हड़कंप मच गया। मामला मुख्यमंत्री के पास पहुंचा तो उन्होंने भी इस पर आपत्ति जताई। सूत्रों का कहना है कि अधिकारियों के खेद जताने और अपील के फैसले को वापस लेने के बाद ही मामला सुलटा।
दरअसल शासन ने भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त कर्मचारी की बहाली से संबंधित ट्रिब्यूनल के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया था। कृषि मंत्री का कहना है कि मामला उनके विभाग का है, लेकिन अफसरों ने पूछना तक जरूरी नहीं समझा।
मांगने के बावजूद अफसरों ने नहीं दी फाइल
कृषि मंत्री के मांगने के बावजूद मामले की पत्रावली तक उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद 14 अगस्त को उन्होंने इस मामले से जुड़ी एक फाइल पर कड़ी टिप्पणी लिख दी। 28 अगस्त को फाइल मुख्यमंत्री हरीश रावत के पास पहुंची तो उन्होंने कृषि मंत्री को पूरी स्थिति से अवगत कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पहले ही अपनाई जानी चाहिए थी।
यह है मामला
कृषि विभाग में अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामले में वर्ष 2010 में बर्खास्त कर्मचारी को इस वर्ष लोक सेवा अभिकरण (पब्लिक सर्विस ट्रिब्यूनल) ने बहाल करते हुए अन्य भत्तों का लाभ देने का आदेश दिया था। ट्रिब्यूनल ने फैसले में यह भी कहा कि विभाग चाहे तो इस फैसले के आठ महीने के भीतर मामले की जांच कर कर्मचारी को सस्पेंड कर सकता है। शासन ने न्याय विभाग से राय मांगने के बाद इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की सिफारिश की थी।
सीएम के हस्तक्षेप से मामला सुलझा
मामला संज्ञान में लाए बिना अफसरों ने हाईकोर्ट में अपील के आदेश कर दिए थे। मामला जब मुख्यमंत्री के पास पहुंचा तो प्रमुख सचिव कृषि को गलती का एहसास हुआ। हालांकि ऐसा गलतफहमी में हुआ है। सरकार इस मामले में ट्रिब्यूनल के आदेश का पालन करेगी। कर्मचारी आरटीआई में सूचनाएं मांगता है, लिहाजा कुछ अफसर उससे नाराज थे।
-डॉ. हरक सिंह रावत, कृषि मंत्री
यह लिखा था
ऐसे गंभीर प्रकरण को बिना मेरे संज्ञान में लाए अपील करना कार्यपालिका एवं गुड गवर्नेंस के अनुरूप नहीं है। मेरे द्वारा 12 जून 2014 को पत्रावली तीन दिन में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। निर्देश का पालन नहीं किया गया। अफसरों की मनमानी से सरकार कमजोर दिखे ऐसा नहीं होना चाहिए। ऐसे स्थिति में मैं कृषि विभाग में कोई भी काम करने में असमर्थ हूं।
-(14 अगस्त 2014 को फाइल पर कृषि मंत्री हरक सिंह रावत की टिप्पणी)
(नोटः इस खबर से संबंधित किसी भी सुझाव या सवाल के लिए मेल आईडी-bsbora@ddn.amarujala.com और इस नंबर- 9675202099 पर संपर्क कर सकते हैं।)