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हरक सिंह बोले, कुंजवाल जी ने तो मेरी गर्दन ही हलाल कर दी थी

Fri, 16 Jun 2017 11:35 AM IST
विपिन बनियाल/ अमर उजाला, देहरादून
विपिन बनियाल/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 16 Jun 2017 11:35 AM IST
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harak singh rawat attack on govind singh kunjwal in uttarakhand assembly session
harak singh rawat vs govind singh

सदन में कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत की जगह वही पुरानी है। गोविंद सिंह कुंजवाल जरूर अब स्पीकर की कुर्सी की जगह विपक्ष की बेंच पर हैं। एक लिहाज से दोनों आमने-सामने हैं। 18 मार्च 2016 के सियासी संग्राम के दोनों मुख्य किरदार सदन में जुबानी जंग में भी आमने-सामने हुए।

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दोनों के तरकश से कई तीर निकले। जमकर हमले हुए। विनियोग बिल की तारीख जरूर बदली हुई थी, मगर प्रश्नकाल के दौरान सियासी दुश्मनी के रंग पहले जैसे ही पक्के दिखाई दिए। प्रचंड बहुमत की सरकार का हिस्सा होने के बावजूद हरक सिंह रावत सियासी संग्राम की आग में जलते हुए दिखे, तो गोविंद सिंह कुंजवाल का हाल भी अलग नहीं था। सदन में सियासी संग्राम की परछाई कभी ओझल, तो कभी मौजूद दिखाई दी।
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विनियोग बिल के दौरान ही पिछले साल सत्ता संग्राम और सियासी बगावत का उत्तराखंड ने ऐसा नजारा देखा था, जिसने एक नया इतिहास लिखा। 15 जून को प्रश्नकाल पर हरीश रावत समर्थकों और बगावत करने वाले कांग्रेसियों के बीच कड़वाहट पूरे प्रभाव में दिखाई दी। एक सवाल का जवाब देते-देते डॉ. हरक सिंह रावत रौ में बह गए।
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उन्होंने विपक्ष को उकसाया। कहा-हम पिछली सरकार की तरह फर्जी घोषणाएं नहीं करते। हरीश रावत समर्थकों ने जवाब में हरक सिंह रावत को निशाने पर लिया। कहा-उस सरकार के आप भी हिस्से थे। इसके बाद, तो हरक सिंह रावत ने जैसे जवाब देने के लिए कमर ही कस ली।

हरक बोले, कुंजवाल जी ने तो मेरी गर्दन हलाल कर दी थी

harak singh rawat attack on govind singh kunjwal in uttarakhand assembly session
uttarakhand assembly house

गोविंद सिंह कुंजवाल से मुखातिब हुए और सीधे सपाट शब्दों में कहा-कुंजवाल जी ने तो मेरी गर्दन ही हलाल कर दी थी। ये अलग बात है कि बाद में हरीश रावत जी ही हलाल हो गए।

सियासी संग्राम की यादों से तपे सदन के माहौल में कांग्रेस के हरीश रावत समर्थक युवा विधायकों के जवाब आक्रामक थे, तो बुजुर्ग गोविंद सिंह कुंजवाल के संयत।

कुंजवाल ने कहा-मंत्री रहने के बावजूद हरक सिंह जिस तरह से पिछली सरकार के बारे में बातें कर रहे हैं, वह पूरी तरह संविधान के खिलाफ  है, क्योंकि उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ ली थी। तीखे जुबानी हमलों के बीच कुछ विधायकों ने प्रश्नकाल का समय जाया होने की बात कही, तो स्पीकर के निर्देश पर स्थिति संभल पाई।

दिग्गज और बडे़ नेताओं की सियासी अदावत का प्रभाव उनके नजदीकी नातेदारों और रिश्तेदारों तक भी कैसे पहुंचा है, इसकी बानगी सदन में दिखी। पूर्व सीएम विजय बहुगुणा के बेटे सितारगंज विधायक सौरव बहुगुणा ने भी जुबानी जंग के बीच में टिप्पणी करके अपनी भूमिका अदा की। उन्हें विपक्ष में मौजूद पूर्व सीएम हरीश रावत के साले रानीखेत विधायक करन माहरा ने जवाब दिया। दोनों के बीच हल्की कहा-सुनी भी हुई।

सियासी संग्राम की यादों में संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत भी कूदे, लेकिन हल्के-फुल्के अंदाज में। उन्होंने गोविंद सिंह कुंजवाल को पितामह करार दिया। सियासी संग्राम और सदन में बगावत को याद करते हुए उन्होंने कहा कि चीरहरण हो रहा था और पितामह चुप रहे।

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