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एक मंत्री का ऐसा 'रूप' देखा न होगा कहीं...
अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 27 Dec 2013 01:07 PM IST
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उत्तराखंड के कृषि मंत्री हरक सिंह रावत ने बहनोई यशवंत सिंह बर्त्वाल को कृषि विभाग में डेपुटेशन पर लाने के लिए सभी नियम कायदों को ताक पर रख दिया।
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बायोडाटा पर ही डेपुटेशन के निर्देश
तय प्रक्रिया अपनाने के बजाय मंत्री ने अपने बहनोई के बायोडाटा पर ही डेपुटेशन के निर्देश लिख दिए। कृषि निदेशक को भेजे इस बायोडाटा पर उन्होंने प्रमुख सचिव के माध्यम से प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
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किसी भी विभाग में प्रतिनियुक्ति दो तरीके से होती है। एक तरीका यह है कि विभाग समाचार पत्रों में विज्ञप्ति प्रकाशित करे। इसके तहत आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों का इंटरव्यू होता है और फिर मेरिट के आधार पर चयन।
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इसके लिए अभ्यर्थी के मूल विभाग से एनओसी भी जरूरी है। दूसरा तरीका यह है कि जरूरतमंद विभाग अन्यसभी विभागाध्यक्षों को सरकुलेट करेगा कि विभाग में कितने लोगों को प्रतिनियुक्ति पर रखा जाना है।
इन पदों के योग्य अधिकारी या कर्मचारी तय प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं। लेकिन, यशवंत सिंह बर्त्वाल की प्रतिनियुक्ति के लिए कृषि मंत्री ने नई प्रक्रिया ही बना दी।
...वैसे बेहद सख्त है विभाग
प्रवक्ता यशवंत सिंह बर्त्वाल बिना एनओसी लिए कृषि विभाग में सहायक निदेशक के पद पर डेपुटेशन पर चले गए, लेकिन शिक्षा विभाग कुछ नहीं कर पाया। वैसे यह विभाग अन्य शिक्षकों की लापरवाही पर बेहद सख्त नजर आता है।
बीते दिनों रुद्रप्रयाग से अपनी समस्या लेकर सचिवालय पहुंचे शिक्षक हरीश चंद्र विश्वकर्मा के खिलाफ अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई का निर्देश जारी कर दिया। स्कूल के प्रिंसिपल से भी जवाब तलब किया गया।
अधिकारियों का तर्क है कि बिना कारण सचिवालय आने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई तय है। शिक्षा विभाग में अपर निदेशक सीमा जौनसारी ने कहा कि शिक्षक सीधे निदेशालय और सचिवालय नहीं आ सकते। वहीं, यशवंत बर्त्वाल प्रकरण में अभी तक कार्रवाई न होने के मामले में उन्होंने कहा कि क्या करें कोई सुनता ही नहीं।
प्रवक्ता ने खुद भी लिखा था पत्र
राजकीय इंटर कॉलेज धारी कीर्तिनगर में तैनात शिक्षक यशवंत सिंह बर्त्वाल ने डेपुटेशन के लिए सीधे प्रमुख सचिव कृषि को पत्र लिखा था। पत्र में बर्त्वाल ने कहा कि उन्होंने प्रवक्ता भौतिकी के पद पर रहते हुए छात्रों के विकास के लिए उल्लेखनीय कार्य किया है।
प्रदेश स्तरीय परीक्षाओं का संचालन किया और विज्ञान प्रदर्शनी में राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। वे अब शिक्षण अनुभव का लाभ कृषि विभाग में देना चाहते हैं।