Happy Birthday Titoli: बागेश्वर में शुरू हुई इस पहल की हर जगह हो रही चर्चा, लोगों ने किया अपनी माटी से एक वादा
रोजगार और बेहतर मूलभूत सुविधाओं की तलाश लोगों को गांव छोड़ने के लिए मजबूर कर रही है। कई गांवों के सामने अस्तित्व को बचाने का संकट पैदा हो रहा है। बागेश्वर जिले के टिटोली गांव के ग्रामीणों ने इस पीड़ा को समझा है। पलायन रोकने और अपनी विरासत को सहेजने के लिए उन्होंने अनूठी पहल की है।
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बागेश्वर जिले के टिटोली गांव के लोगों ने केक काटकर न सिर्फ गांव का 129वां स्थापना दिवस मनाया बल्कि साल में दो से तीन बार गांव आकर विकास कार्य करने की शपथ भी ली। 24 जून 1894 को काफलीगैर तहसील के छौना बिलौरी से कांडा आए भवान सिंह रौतेला ने 99 रुपये में जमीन खरीदकर टिटोली गांव को बसाया था।
रोजगार और बेहतर मूलभूत सुविधाओं की तलाश लोगों को गांव छोड़ने के लिए मजबूर कर रही है। कई गांवों के सामने अस्तित्व को बचाने का संकट पैदा हो रहा है। बागेश्वर जिले के टिटोली गांव के ग्रामीणों ने इस पीड़ा को समझा है। पलायन रोकने और अपनी विरासत को सहेजने के लिए उन्होंने अनूठी पहल की है।
24 जून 1894 को काफलीगैर तहसील के छौना बिलौरी से कांडा आए भवान सिंह रौतेला ने 99 रुपये में जमीन खरीदकर टिटोली गांव को बसाया था। उनके दो बेटों जीवन सिंह और राम सिंह के तीन-तीन बेटों ने गांव का विस्तार किया। धीरे-धीरे गांव की आबादी 10 परिवार से अधिक हो गई। हालांकि इस समय अधिकतर परिवारों के गांव छोड़ने के कारण यहां सिर्फ पांच परिवार ही बचे हैं।
रिटायर्ड मेजर बीएस रौतेला दो अप्रैल को संवत्सर प्रतिपदा के दिन गांव आए तो उन्होंने गांव के विकास पर चर्चा की। बैठक में गांव का स्थापना दिवस मनाने की रूपरेखा तय की गई। बाहर बस गए परिवारों ने भी गर्मियों के अवकाश में कार्यक्रम में आने की सहमति जताई।
शुक्रवार को ग्रामीणों ने धूमधाम से गांव का स्थापना दिवस मनाया। कार्यक्रम में गांव में रहने वाले पांच परिवारों के अलावा मुंबई से आए तीन परिवार, दिल्ली से आए दो परिवार और हल्द्वानी में रहने वाले गांव के लोगों ने भी भाग लिया। ग्रामीणों ने गांव को आबाद रखने, पलायन को दूर करने और विरासत को जीवित रखने का संकल्प लिया।
वरिष्ठ नागरिक नारायण सिंह रौतेला ने काटा केक
स्थापना दिवस कार्यक्रम की शुरुआत मार्कंडेय पूजा से हुई। वरिष्ठ नागरिक नारायण सिंह रौतेला ने केक काटा। ग्रामीणों ने अपने-अपने घरों में पकवान बनाए। मेजर बीएस रौतेला ने बताया कि वर्ष 1870 में उनके परदादा भवान सिंह रौतेला छाना बिलौरी से कांडा क्षेत्र में आए तो उन्होंने धपोलासेरा, भदौरा, भेटा आदि गांवों में शरण ली। बाद में उन्होंने टिटोली में जमीन खरीदकर घर बनाया। कार्यक्रम में दीवान सिंह, आनंद सिंह, राजेंद्र सिंह रौतेला, कृपाल सिंह, गोविंद सिंह आदि मौजूद रहे।
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वीर जवानों का गांव है टिटोली
वर्ष 1916 में गांव के गुमान सिंह रौतेला सेना में भर्ती होने वाले पहले व्यक्ति थे। धन सिंह रौतेला ने द्वितीय विश्व युद्ध और 1948 में हुए भारत-पाक युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया था। इसके लिए उन्हें सेना के वीर चक्र से सम्मानित किया गया। इस समय भी गांव के कई लोग सेना में हैं।