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फेफड़ों में उतर कर यह बीमारी ले रही जान

Wed, 20 Nov 2013 05:42 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 20 Nov 2013 05:42 PM IST
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half population of Uttarakhand smokes

उत्तराखंड की लगभग आधी आबादी धुम्रपान करती है। यह बात इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के सर्वेक्षण रिपोर्ट में बताई गई है।

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बढ़ रहे रोगी
धुम्रपान की इस लत के कारण लोगों में क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के रोगी बढ़ रहे हैं। इस रोग में सांस की नली संकरी हो जाती है और फेफड़ों का लचीलापन घट जाता है।
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विश्व सीओपीडी दिवस की पूर्व संध्या पर वरिष्ठ वक्ष रोग विशेषज्ञ डॉ. जगदीश रावत ने सहारनपुर रोड स्थित एक होटल में पत्रकारों को बताया कि 25 से 50 फीसदी लोगों को शुरुआत में पता ही नहीं चलता है कि उन्हें सीओपीडी है।

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दिक्कत जब अधिक बढ़ती है तो लोग अस्पताल पहुंचते हैं। इस रोग का पता जितनी जल्दी लग जाए, उसका उतना प्रभावी इलाज किया जा सकता है। डॉ. रावत ने बताया कि आईसीएमआर केसर्वेक्षण के मुताबिक उत्तराखंड के 35 फीसदी पुरुष और 15 फीसदी महिलाएं धुम्रपान करती हैं।

खास बात
- स्पिरोमेट्री टेस्ट कराएं
- सीओपीडी का इलाज नहीं है
- प्रभावी उपचार से सामान्य जीवन जिया जा सकता है

यह होता है सीओपीडी में
एलर्जी के कारण सांस की नली संकरी हो जाती है। इसके साथ ही फेफड़ों की कोशिकाओं का लचीलापन कम हो जाता है। फेफड़ा ढंग से फूल-पिचक नहीं पाता। इससे फेफड़ों के अंदर की हवा बाहर नहीं निकलती जिससे व्यक्ति सांस नहीं ले पाता है।

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