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हल्द्वानी के बाद अब देहरादून में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हुंकार, धरने पर बैठे

Mon, 27 Jan 2020 03:02 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 27 Jan 2020 03:02 PM IST
सार

  • संविधान बचाओ मंच ने शनिवार को शुरू किया 72 घंटे का धरना 
  • संविधान की प्रस्तावना के पाठ के साथ गाया गीत

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haldwani: CAA protest in buddha park
प्रदर्शन में बैठे लोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सीएए, एनआरसी और एनपीआर के विरोध में बनभूलपुरा में 60 घंटे तक लगातार चले धरने के बाद अब बुद्ध पार्क में 72 घंटे का सत्याग्रह चल रहा है। यह धरना 28 जनवरी को सुबह 11 बजे (72 घंटे) तक चलेगा।विगत शनिवार को शुरू हुआ यह प्रदर्शन आज सोमवार को भी जारी रहा। संविधान बचाओ मंच के बैनर तले शुरू हुए धरने में माले, कांग्रेस, किसान महासभा, डॉ. अंबेडकर मिशन, समाजवादी पार्टी समेत कई संगठनों से जुड़े लोग शामिल हुए हैं।

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सीएए के विरोध में मुस्लिमों का प्रदर्शन 

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में सोमवार को मुस्लिम समुदाय के लोगों ने महिलाओं के साथ प्रदर्शन किया। सोमवार को महिलाओं मुस्लिम समुदाय के लोग परेड ग्राउंड स्थित धरना स्थल पर इकट्ठा हुए। उन्होंने केंद्र सरकार के नए कानून के खिलाफ नारेबाजी की। इसके साथ ही उन्होंने बेमियादी धरना शुरू कर दिया।

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धरने में काफी संख्या में मुस्लिम महिलाएं भी शामिल हुईं। शहर काजी मौलाना मोहम्मद अहमद कासमी ने भी धरने को समर्थन दिया। धरने के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता रजिया बेग ने कहा कि केंद्र सरकार नागरिकता कानून के माध्यम से देशवासियों को बांटने का काम कर रही है। दूसरी ओर, तंजीम ए रहनुमा ए मिल्लत ने 29 जनवरी को व्यापारियों से सीएए के विरोध में अपने प्रतिष्ठान बंद रखने का आह्वान किया है। 

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28 जनवरी को सुबह 11 बजे (72 घंटे) तक चलेगा धरना


नागरिकता संशोधन कानून, राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए शनिवार सुबह 11 बजे बुद्ध पार्क में धरने की शुरुआत संविधान की प्रस्तावना के सामूहिक पाठ से की गई।


माले के राज्य सचिव राजा बहुगुणा ने कहा कि देश में सीएए और एनआरसी के विरोध को देखते हुए केंद्र सरकार को तत्काल फैसला वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई संविधान और लोकतंत्र बचाने की है। जनकवि बल्ली सिंह चीमा ने कहा कि इस दौर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर जिस तरह से अंकुश लगाने की कोशिशें की जा रही हैं, वह आपातकाल की याद दिलाती है।

गीत भी गाए गए

जनता के पक्ष में खड़े होकर आवाज उठाने वाले कवि, लेखक, पत्रकारों बुद्धिजीवियों, प्रोफेसरों, कलाकारों और छात्रों को देशद्रोही घोषित किया जा रहा है। केंद्र सरकार का प्रतिकार करना हर बुद्धिजीवी, लेखक व भारतीय नागरिक का कर्तव्य बन गया है।

इंदिरानगर बड़ी मस्जिद के इमाम मौलाना सैय्यद इरफान रसूल ने कहा कि केंद्र सरकार देश में विभाजनकारी माहौल उत्पन्न कर देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे पर चोट कर रही है। अंजू राज ने कहा कि केंद्र सरकार फूट डालो और राज करो की नीति पर चल रही है। बसंत कुमार ने कहा कि अधिकांश जनता सीएए के समर्थन में नहीं है।

धरने को कांग्रेस नेता राहुल छिम्वाल, अब्दुल मतीन सिद्दीकी, हेमंत साहू, हेमंत बगड़वाल, शकील सलमानी, मुफ्ती शाहिद रजा जमाल, नफीस अहमद खान आदि ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने सीएम त्रिवेंद्र  रावत द्वारा आंदोलन में बाहरी लोगों का हाथ होने वाले बयान की तीखी आलोचना की। आरोप लगाया कि भाजपा जन समस्याओं के समाधान की जगह हर मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास करती है। कार्यक्रम का संचालन शकील अंसारी और कैलाश पांडे ने किया।

धरनास्थल पर जनकवि बल्ली सिंह चीमा ने घर-घर पहुंचा बाबा साहेब का संविधान और भगत सिंह का पैगाम, जय भीम-जय लाल सलाम समेत अन्य रचनाएं सुनाईं। 
 

 

60 घंटे में थमा तो 12 घंटे बाद फिर शुरू हो गया आंदोलन

 

सीएए के विरोध में ताज चौराहे और लाइन नंबर आठ में 60 घंटे से आंदोलनरत महिलाओं का धरना बृहस्पतिवार रात करीब 11 बजे खत्म कराकर पुलिस ने राहत की सांस ली थी, लेकिन उसके 12 घंटे बाद अब बुद्ध पार्क में आंदोलन शुरू हो गया। हालांकि यह धरना पहले से ही प्रस्तावित था। माले के जिला सचिव कैलाश पांडे ने बताया कि यह धरना 28 जनवरी को सुबह 11 बजे (72 घंटे) तक चलेगा।

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