दूसरे स्टेट के डॉक्टर को नहीं मिलेगा 'आराम'
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उत्तराखंड देश के पहला पर्वतीय राज्य होगा जो केंद्र सरकार के गेस्ट डॉक्टरों के सुझाव को अमलीजामा पहनाने जा रहा है।
सरकार ने गेस्ट डॉक्टर को दी जाने वाली सुविधाओं का खाका खींच दिया है। जल्द ही इस प्रस्ताव पर कैबिनेट की मुहर लगाने की तैयारी है।
पर्वतीय राज्यों के ऊंचाई वाले इलाकों में चिकित्सा सुविधाओं की कमी और डॉक्टरों की ओर से की जा रही उपेक्षा का रास्ता केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने निकाला है।
स्वास्थ्य मंत्री ने देश भर के डॉक्टरों को पहाड़ों पर रेस्ट (आराम) के साथ राज्य सरकारों का गेस्ट (मेहमान) बनने का मौका दिया है।
जिसके तहत पहाड़ों पर घूमने और आराम के लिए आने वाले डॉक्टर स्थानीय लोगों का चेकअप और इलाज भी करेंगे। विशेषज्ञ डॉक्टरों के आने पर संबंधित बीमारी से जूझ रहे आसपास के मरीजों को एक जगह पर भी बुलाया जा सकेगा।
सरकार ने तय की गेस्ट डॉक्टरों की भूमिका
उत्तराखंड सरकार ने गेस्ट डॉक्टरों की भूमिका तय कर दी है। उत्तराखंड के दौरे पर आने वाले डॉक्टरों को सूचना देनी होगी। जिसके लिए उन्हें क्लास वन के बराबर गंतव्य तक का यात्रा भत्ता दिया जाएगा। जिस इलाके में वह रुकेंगे वहां सरकारी गेस्ट हाउस होने की स्थिति में उन्हें वहीं ठहरने और खानपान की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
ऐसा न होने पर प्रतिदिन दो हजार रुपए भत्ता दिया जाएगा। जिसे बाद में बढ़ाया भी जा सकता है। गेस्ट डॉक्टर आसपास के संबंधित अस्पताल या फिर किसी सरकारी भवन में प्रतिदिन इलाके के मरीजों को देखेंगे।
जिले में आने वाले विशेषज्ञ डॉक्टरों का लाभ उनसे संबंधित मरीजों को एक जगह जुटाकर भी किया जाएगा। सरकार इसके लिए एक सिस्टम तैयार कर रही है ताकि देश भर से कौन सा डॉक्टर कब और कहां आ रहा है इसकी सूचना स्थानीय स्तर पर पहले से उपलब्ध हो।