फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   ground reporting of uttarakhand village

खच्चरों पर लदकर आती है वोट ‘कब्जाने’ वाली मशीन

Mon, 21 Apr 2014 06:18 PM IST
हेम कांडपाल/अमर उजाला, अल्मोड़ा
हेम कांडपाल/अमर उजाला, अल्मोड़ा Updated Mon, 21 Apr 2014 06:18 PM IST
विज्ञापन
ground reporting of uttarakhand village

खजुरानी गांव की गिनती उत्तराखंड की द्वाराहाट विधानसभा क्षेत्र के उन गांवों में होती है, जहां लोकतंत्र, आजादी के मायने शून्य हैं। वहां जब पहुंचे तब तक हमें ऐसा नहीं लगा कि यहां के लोग 21वीं सदी में जी रहे हैं।

विज्ञापन


दो सौ साल पहले के गांवों के बारे में जैसा सुना था, वैसी ही एक आदिम दुनिया से यहां साक्षात्कार हुआ। जंगलों, चट्टानों को पार करते हुए खुद यह तय करना पड़ा कि यहीं कहीं आसपास गांव होगा।
विज्ञापन


बिमोली गधेरे के किनारे से होते हुए करीब 21 किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर लेने के बाद आजादी से अनजान लोगों की धरती मिली।

खच्चर पर आती है ईवीएम मशीन

ground reporting of uttarakhand village

खजूर के एक बड़े वृक्ष के नाम पर इस गांव का नाम खजुरानी पड़ा। 500 वोट लेने वाले यहां से ईवीएम को लाने-ले जाने के लिए भाड़े के खच्चर लाते हैं।

प्राथमिक विद्यालय खजुरानी में मतदान केंद्र है, लेकिन यहां किसी तरह की हलचल नहीं थी। लोकसभा चुनाव में दल कौन, उम्मीदवार कौन इसका कोई अता-पता नहीं।

यह द्वाराहाट विधानसभा क्षेत्र का अंतिम मतदान केंद्र है। जहां 500 वोटर वोट डाल सकेंगे। कुल आबादी 1500 है, जबकि काफी लोग पलायन कर गए हैं।

बरसात में गांव का संपर्क पूरी तरह से टूट जाता है। गांव तक जाने के लिए 10 किमी का रास्ता काफी खतरनाक है। थोड़ी-सी चूक मौत के मुंह में धकेल सकती है।

गांधी बंदूक लेकर मुस्तैद रहते हैं मान सिंह

ground reporting of uttarakhand village

जंगली जानवरों को भगाने के लिए बुजुर्गवार मान सिंह मेहता हाथ में गांधी बंदूक लिए मुस्तैद रहते हैं। बताते हैं जंगली जानवरों ने गांव का बेड़ागर्क कर रखा है।

ऊबड़ खाबड़ तंग रास्तों और घने जंगल को पार कर ढाई किलोमीटर चलने के बाद तुस्यारी बगड़ खजुरानी का रेस्ट प्वाइंट है। इस प्वाइंट पर शराब के कुछ खाली अध्धे-पव्वे पड़े मिलते हैं।

रास्तों की हालत ऐसी कि पहचान भी न हो पाए। कुछ स्थानों पर छोटे पेड़ों और झाड़ियों का सहारा लेना पड़ता है। फिर दो किमी की खड़ी चढ़ाई चढ़ने के बाद दुर्गम लोकतंत्र यानी खजुरानी के दर्शन होते हैं।

विज्ञापन

बल्ली के सहारे पार करते हैं नदी

ground reporting of uttarakhand village

मल्ली गजार और चनौला के गधेरे में बनी पुलिया पिछले साल की आपदा में बह गई थी, लेकिन इसे दोबारा बनाने का काम आज तक शुरू नहीं हो सका है।

इससे परेशान लोग बल्लियों के सहारे नदी पार कर रहे हैं। मल्ला गजार में दो पन चक्कियां थीं जो बीते दिनों की आपदा में बह गई हैं। गांव के लोगों को गेहूं पिसाने तीन किलोमीटर दूर पाखाखरक या फिर पांच किलोमीटर दूर तल्ला गजार जाना पड़ता है।

कालापानी हो गया गांव
खजुरानी के लोगों की आजीविका का साधन कृषि, पशुपालन है। रसोई गैस की ढुलाई की समस्या के चलते लोग लकड़ी जलाकर खाना बनाते हैं। प्रधान नरेंद्र सिंह बताते हैं कि सड़क के अभाव में खजुरानी गांव लोगों के लिए कालापानी जैसा हो गया है।

गांव में आते हैं दो अखबार

ground reporting of uttarakhand village

खीड़ा के शोबन सिंह खजुरानी में दो अमर उजाला अखबार भेजते हैं। एक गांव के हाईस्कूल में और दूसरा रमेश सिंह के घर जाता है। रमेश सिंह बताते हैं कि कई बार तो दो दिन बाद अखबार पहुंचता है।

बच्चे नहीं जानते सीएम
प्राथमिक विद्यालय खजुरानी में स्थित ब्लैक बोर्ड में पिछले दो साल से कुछ लिखा ही नहीं गया है।

पूछने पर शिक्षा मित्र भगवती बिष्ट ने बताया कि ब्लैक बोर्ड में काला पेंट ठीक से नहीं लगा है जिससे उस पर लिखना संभव नहीं हो पा रहा है। स्कूल के बच्चों को ब्लॉक, तहसील, देश, पीएम और सीएम आदि की कोई जानकारी नहीं थी।

'बस एक बार गाड़ी से आने की इच्छा है'

ground reporting of uttarakhand village

गांव में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान से मिलने वाले राशन के दोगुने से भी अधिक रेट हैं। दुकानदार हरीश सिंह ने खुद यह बताया कि वह बीपीएल का गेहूं दो के स्थान पर पांच रुपए, चावल तीन की जगह छह रुपए किलो के हिसाब से बेचने को मजबूर हैं।

उनका कहना है कि उन्हें चौखुटिया से खजुरानी तक का सरकारी भाड़ा 213 रुपए मिलता है, जबकि खीड़ा से खजुरानी का एक क्विंटल का खच्चर भाड़ा ही 500 रुपए है। खीड़ा से खजुरानी के बीच कहीं भी मोबाइल नेटवर्क काम नहीं करता है।

गांव के 74 वर्षीय प्रवीन सिंह रौतेला कहते हैं कि वे नहीं जानते कि सरकार क्या होती है और इसे चलाता कौन है। 80 वर्षीय धनुली देवी कहती हैं कि उनकी गांव तक गाड़ी से आने की इच्छा है, देखो इस जीवन में पूरी होती है कि नहीं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed