'टाटा की नैनो निकाल रही है गुजरात में मोदी की हवा'
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टाटा के नैनो मोटर प्लांट के ठीक पीछे अपने चाय के खोखे पर बैठे सियावाड़ा गांव के 65 साल के प्रभुभाई अपनी दुकान से ही सड़क के उस पार की तरफ इशारा कर बताते हैं, ‘साहेब वो देखो हमारा खेत....अभी गेंहू की कटाई-मड़ाई चल रही है।
इस बार फसल अच्छी गई है।’ बात करते-करते चेहरे पर दर्द छलक पड़ता है, ‘पता नहीं कब तक बचा पाऊंगा अपने ये खेत।
जीआईडीसी (गुजरात इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) वाले आते रहते हैं, जमीन का दाम लगाते हैं, मना करने पर कहते हैं कि जमीन तो देनी ही पड़ेगी।‘
ग्रामीण इलाकों में सशक्त मुद्दा
कांग्रेस किसानों से जमीन छीने जाने और उद्योगों व अन्य व्यावसायिक कार्यों के लिए दिए जाने पर भाजपा प्रत्याशियों की घेराबंदी कर रही है तो भाजपा इसे विकास से जोड़ रही है।
हमें क्या मिला?
आठ बीघा जमीन के मालिक प्रभुभाई कहते हैं कि हमारे सिर पर नैनो प्लांट लग तो गया लेकिन हमें क्या मिला। चंद ग्रामीण युवकों को चौथे दर्जे की नौकरी। वो भी प्लांट की हालत बुरी है।
गाड़ियां न बिकने से अब हफ्ते में तीन ही प्रोडक्शन हो रहा है। अहमदाबाद नगर से करीब 45 किलोमीटर दूर बसा साणंद इस जिले की तहसील है।
हाईवे पर होने और सुविधाजनक अप्रोच से पिछले पांच साल में उद्योगों की यहां आमद तेजी से बढ़ी है। यहां नैनो प्लांट के बाद फोर्ड ने भी दो साल पहले कार मैनुफैक्चरिंग यूनिट लगाई। बड़े उद्योगों के लिए यह जगह हॉट डेस्टिनेशन बन गई है।
बेरोजगारी छा रही है
बहुराष्ट्रीय कंपनियों हिटैची, यूनीलीवर भी पीछे नहीं रहीं। गांववालों की यह भी शिकायत है कि जीआईडीसी दो साल पहले 40 लाख रुपए बीघा तक किसानों को जमीन के दाम दे रहा था लेकिन अब इसे घटाकर 28 लाख 56 हजार रुपए कर दिया गया है।
टाटा का प्रोडक्शन कम होने से आसपास की 40 वेंडर यूनिटों में भी बेरोजगारी छा रही है। नैनो प्लांट और उसके वेंडर की आमद से करीब 10 गांवों की जमीन का अधिग्रहण हुआ। यूं तो किसानों को अच्छी-खासी रकम मिली लेकिन सब मकान, गाड़ी जैसी सुविधाएं जुटाने में फुंक गया।
दुधारू पशु बेच डाले
सियावाड़ा गांव के 30 साल के युवा किसान रमेशभाई बताते हैं कि एकमुश्त मोटी रकम मिलने पर किसानों को कुछ नहीं सूझा तो सोने के बिस्कुट खरीद कर रख लिए, अब टुकड़े-टुकड़े बेचकर गुजारा कर रहे हैं।
टाटा को प्लांट के लिए मोदी सरकार ने कृषि विश्वविद्यालय की जो 11 सौ एकड़ जमीन दी, वह गोचर भूमि थी। यहां कई गांवों के किसान अपने जानवरों को चराने आते थे। अब उनके सामने चारा का संकट आया तो उन्होंने अपने दुधारू पशु बेच डाले।
जमीन जाने के बाद किसानों पर यह दोहरी मार है। किसानों का यह भी आरोप है कि नैनो के प्लांट की वजह से गांवों में सिंचाई की समस्या खड़ी हो गई है। अहमदाबाद हाईवे से करीब दो किलोमीटर अंदर बसा कालड़ा गांव इन दिनों सुर्खियों में है। यहां जीआईडीसी किसानों को अपनी जमीन 28 लाख रुपए बीघा बेचने का दबाव डाल रही है, लेकिन किसान 40 से 50 लाख के बीच का भाव मांग रहे हैं।