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अब तो जागो सरकार, शौचालयों का करो उद्धार
सुनीत द्विवेदी / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 20 Nov 2016 10:56 AM IST
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नगर निगम देहरादून
- फोटो : file photo
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देहरादून नगर निगम भले ही ग्रीन दून-क्लीन दून का दावा करे, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है।
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विश्व शौचालय दिवस पर अमर उजाला ने शहर के तमाम शौचालयों का जायजा लिया। इनमें से तमाम शौचालय खस्ताहाल मिले। बात चाहे निरंजनपुर मंडी और गढ़ी कैंट के पास मौजूद शौचालय की हो, या फिर जाखन व घंटाघर की। सभी जगह शौचालयों की स्थिति बुरी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान को दो साल बीत चुके हैं। वह शौचालय से देवालय का नारा भी दे चुके हैं। इसे लेकर नगर निगम ने बीते दो अक्टूबर को शहर के कुल 60 में से 20 वार्डों को शौच मुक्त करने का दावा किया, लेकिन 2500 शौचालय बनाने के लक्ष्य में से अभी केवल 1100 ही बन पाए हैं।
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ऐसी स्थिति में शहर कब तक शौच मुक्त होगा, अंदाजा खुद लगाया जा सकता है। वहीं, शहर के सामुदायिक शौचालयों की भी स्थिति बुरी है। अधिकांश शौचालय जीर्णशीर्ण हालत में होने के कारण बंद पड़े है। नतीजतन कई क्षेत्रों के लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। सार्वजनिक शौचालय की बुरी स्थिति होने से पर्यटक और बाजार आने वाले लोग परेशान हैं।
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मोबाइल टायलेट भी कागजों में
महापौर विनोद चमोली ने करीब दो माह पहले शहर में छह मोबाइल टायलेट लगाने के निर्देश दिए थे। इसका प्रस्ताव और खरीद को टेंडर अभी तक कागजों में चल रहा है। लोगों को यह सेवा कब मिलेगी, यह कह पाना अभी मुश्किल ही है।
महिलाओं के लिए बने शौचालयों के दरवाजे ही गायब
शहर के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं के लिए बने शौचालयों के दरवाजे ही गायब हैं। वहीं, झालाना समेत दर्जनों ऐसी जगह हैं, जहां महिलाओं के लिए अलग से कोई सुविधा नहीं है।
सामुदायिक शौचालयों की स्थिति भी बदतर
शहर में 80 के करीब सामुदायिक शौचालयों का संचालन नगर निगम और एमडीडीए करता है। पर ये शौचालय देखरेख के अभाव में खंडहर में तब्दील हो गए हैं। देवभूमि जनसेवा ग्रुप और सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र सिंह नेगी ने शहर के शौचालयों से संबंधी सूचना नगर निगम, एमडीडीए और पर्यटन विभाग से मांगी, जिसमें शहर के शौचालयों की हकीकत का पता चलता है।
यह है स्थिति
खंडहर होने पर बंद पड़े शौचालय - 22
मरम्मत की बांट जोहते शौचालय - 15
अतिक्रमण की जद में- 1
दुरुस्त शौचालय - 33
2500 में से 1100 शौचालय बनकर तैयार हो गए हैं। इस दिशा में तेजी से कार्य चल रहा है। पैसा मिलने पर अन्य शौचालयों के साथ ही खराब और जर्जर पड़े शौचालयों को भी दुरुस्त किया जाएगा।
- विनोद चमोली, महापौर