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परिवहन निगम की कार्यशाला की जमीन पर ही बनेगी ग्रीन बिल्डिंग , आपदा और मानसून की खबर
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स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत अत्याधुनिक ग्रीन बिल्डिंग के निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। स्मार्ट सिटी की बोर्ड बैठक में ग्रीन बिल्डिंग का निर्माण परिवहन निगम की कार्यशाला की जमीन पर ही करने का प्रस्ताव पारित कर इसे हाई पावर स्टीयरिंग कमेटी को भेजने की तैयारी है। हाई पावर स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
बता दें कि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 184 करोड़ की लागत से ग्रीन बिल्डिंग का निर्माण किया जाना है। अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त ग्रीन बिल्डिंग में कलक्ट्रेट के साथ ही विकास भवन के दो दर्जन से अधिक विभागों के समेत कई सरकारी विभागों के कार्यालय होंगे। स्मार्ट सिटी परियोजना अधिकारियों की ओर से ग्रीन बिल्डिंग की डीपीआर भी तैयार कर ली गई है, लेकिन असल समस्या जमीन की है। पहले ग्रीन बिल्डिंग को वर्तमान कलक्ट्रेट की जगह बनाया जाना था, लेकिन कलक्ट्रेट के सभी कार्यालयों को नई जगह शिफ्ट करना और वर्तमान कलक्ट्रेट के सभी भवनों को तोड़कर ग्रीन बिल्डिंग का निर्माण किया जाना इतना आसान नहीं है।
वर्तमान में कलक्ट्रेट में ग्रीन बिल्डिंग बनाए जाने को लेकर अधिवक्ता भी समय-समय पर विरोध कर रहे हैं। ऐसे में अब ग्रीन बिल्डिंग को परिवहन निगम की वर्तमान कार्यशाला की खाली पड़ी जमीन में बनाने की तैयारी है। इसके लिए स्मार्ट सिटी परियोजना की ओर से परिवहन निगम को जमीन की कीमत का भुगतान भी किया जाएगा। स्मार्ट सिटी परियोजना के सीईओ एवं जिलाधिकारी डॉ. आर राजेश कुमार का कहना है कि ग्रीन बिल्डिंग के निर्माण के लिए सारी प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है। डीपीआर तैयार है। जैसे ही सरकार व शासन स्तर की हाई पावर स्टीयरिंग कमेटी की ओर से जमीन को लेकर अंतिम निर्णय ले लिया जाएगा, टेंडर जारी करने के साथ ही ग्रीन बिल्डिंग का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।
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जलभराव पर अधिकारी कार्रवाई के लिए रहें तैयार : डीएम
मानसून के दौरान राजधानी के विभिन्न इलाकों में होने वाले जलभराव की समस्या से जिला प्रशासन की चिंताएं बढ़ गई हैं। डीएम डॉ. आर राजेश कुमार ने जिला प्रशासन, नगर निगम, सिंचाई विभाग समेत संबंधित विभागों के अधिकारियों को चेतावनी दी है कि यदि मानसून के दौरान राजधानी में जलभराव हुआ तो वे सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे। अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने नगर निगम और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को हिदायत दी है कि मानसून की दस्तक से पहले रिस्पना, बिंदाल नदियों के साथ ही नालों और नालियों की सफाई करा लें ताकि मानसून के दौरान दिक्कत ना हो।
आपदा के मद्देनजर तैयारियां पूरी करने के निर्देश
डीएम ने आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को निर्देशित किया है कि मानसून के दौरान भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने को लेकर अभी से ही तैयारियां पूरी कर ली जाएं। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि मानसून के दौरान जिन इलाकों में सड़कों के टूटने और हिमस्खलन की संभावना रहती है, वहां अभी से ही व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली जाएं। उन्होंने राजस्व, सिंचाई, पीडब्ल्यूडी, आपदा प्रबंधन समेत सभी विभागों के अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि मानसून की दस्तक से पहले आपदा प्रबंधन को लेकर सभी जरूरी कदम समय रहते उठा लिए जाएं। यदि आपदा प्रबंधन में किसी भी विभाग की लापरवाही पाई गई तो विभागाध्यक्ष के खिलाफ सीधे तौर पर कार्रवाई की जाएगी। डीएम ने जिला आपदा प्रबंधन कक्ष में भी सभी तैयारियों को पूरा करने के आदेश दिए हैं। उनका कहना है कि वह आपदा संभावित इलाकों का भ्रमण कर जायजा लेंगे और किसी भी स्तर पर खामियां पाई गईं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे।
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बता दें कि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 184 करोड़ की लागत से ग्रीन बिल्डिंग का निर्माण किया जाना है। अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त ग्रीन बिल्डिंग में कलक्ट्रेट के साथ ही विकास भवन के दो दर्जन से अधिक विभागों के समेत कई सरकारी विभागों के कार्यालय होंगे। स्मार्ट सिटी परियोजना अधिकारियों की ओर से ग्रीन बिल्डिंग की डीपीआर भी तैयार कर ली गई है, लेकिन असल समस्या जमीन की है। पहले ग्रीन बिल्डिंग को वर्तमान कलक्ट्रेट की जगह बनाया जाना था, लेकिन कलक्ट्रेट के सभी कार्यालयों को नई जगह शिफ्ट करना और वर्तमान कलक्ट्रेट के सभी भवनों को तोड़कर ग्रीन बिल्डिंग का निर्माण किया जाना इतना आसान नहीं है।
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वर्तमान में कलक्ट्रेट में ग्रीन बिल्डिंग बनाए जाने को लेकर अधिवक्ता भी समय-समय पर विरोध कर रहे हैं। ऐसे में अब ग्रीन बिल्डिंग को परिवहन निगम की वर्तमान कार्यशाला की खाली पड़ी जमीन में बनाने की तैयारी है। इसके लिए स्मार्ट सिटी परियोजना की ओर से परिवहन निगम को जमीन की कीमत का भुगतान भी किया जाएगा। स्मार्ट सिटी परियोजना के सीईओ एवं जिलाधिकारी डॉ. आर राजेश कुमार का कहना है कि ग्रीन बिल्डिंग के निर्माण के लिए सारी प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है। डीपीआर तैयार है। जैसे ही सरकार व शासन स्तर की हाई पावर स्टीयरिंग कमेटी की ओर से जमीन को लेकर अंतिम निर्णय ले लिया जाएगा, टेंडर जारी करने के साथ ही ग्रीन बिल्डिंग का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।
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जलभराव पर अधिकारी कार्रवाई के लिए रहें तैयार : डीएम
मानसून के दौरान राजधानी के विभिन्न इलाकों में होने वाले जलभराव की समस्या से जिला प्रशासन की चिंताएं बढ़ गई हैं। डीएम डॉ. आर राजेश कुमार ने जिला प्रशासन, नगर निगम, सिंचाई विभाग समेत संबंधित विभागों के अधिकारियों को चेतावनी दी है कि यदि मानसून के दौरान राजधानी में जलभराव हुआ तो वे सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे। अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने नगर निगम और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को हिदायत दी है कि मानसून की दस्तक से पहले रिस्पना, बिंदाल नदियों के साथ ही नालों और नालियों की सफाई करा लें ताकि मानसून के दौरान दिक्कत ना हो।
आपदा के मद्देनजर तैयारियां पूरी करने के निर्देश
डीएम ने आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को निर्देशित किया है कि मानसून के दौरान भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने को लेकर अभी से ही तैयारियां पूरी कर ली जाएं। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि मानसून के दौरान जिन इलाकों में सड़कों के टूटने और हिमस्खलन की संभावना रहती है, वहां अभी से ही व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली जाएं। उन्होंने राजस्व, सिंचाई, पीडब्ल्यूडी, आपदा प्रबंधन समेत सभी विभागों के अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि मानसून की दस्तक से पहले आपदा प्रबंधन को लेकर सभी जरूरी कदम समय रहते उठा लिए जाएं। यदि आपदा प्रबंधन में किसी भी विभाग की लापरवाही पाई गई तो विभागाध्यक्ष के खिलाफ सीधे तौर पर कार्रवाई की जाएगी। डीएम ने जिला आपदा प्रबंधन कक्ष में भी सभी तैयारियों को पूरा करने के आदेश दिए हैं। उनका कहना है कि वह आपदा संभावित इलाकों का भ्रमण कर जायजा लेंगे और किसी भी स्तर पर खामियां पाई गईं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे।