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पोते को मायूस देखकर दादा ने मुख्यमंत्री को भेजी चिट्ठी, मामला है गंभीर

Tue, 20 Jun 2017 08:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार Updated Tue, 20 Jun 2017 08:34 AM IST
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grandfather wrote a letter to chief minister after saw depress grandson
depress boy

अपने आंखों के तारे पोते को मायूस देखकर दादा से रहा नहीं गया। दादा भी पोते की मदद नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में उन्होंने मुख्यमंत्री को चिट्ठी भेजी। विनती की यह विश पूरी कर दो। जानिए, क्या है मामला...

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उत्तराखंड बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में एक छात्र के उम्मीद के अनुरूप अंक नहीं आने की मायूसी को देखते हुए उसके दादा ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को चिट्ठी लिखकर परीक्षा कापी दोबारा जांचने की मांग की। साथ ही भविष्य में मूल्यांकन की त्रुटियां दूर करने के लिए कुछ सुझाव भी दिए हैं।      

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हाईस्कूल में आए 94.2 प्रतिशत अंक, लेकिन इंटरमीडिएट में..

grandfather wrote a letter to chief minister after saw depress grandson
trivendra singh rawat

आदर्श टिहरी डोब नगर निवासी लाखीराम जुयाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बताया कि उनका पोता अमन जुयाल इस साल उत्तराखंड बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में शामिल हुआ था। अमन ने 2015 में हाईस्कूल परीक्षा में 94.2 प्रतिशत अंक हासिल कर मेरिट में जगह बनाई थी।

इस बार भी मेरिट में जगह बनाने के लिए अमन ने भरपूर पढ़ाई की। लेकिन रिजल्ट आने पर पता चला कि उसे 90.4 प्रतिशत नंबर ही मिले हैं। इससे अमन को काफी झटका लगा। लाखीराम जुयाल ने बताया कि अमन मायूस है और इसका कारण त्रुटिपूर्ण मूल्यांकन है।

पत्र में उन्होंने लिखा है कि मूल्यांकन को लेकर गैर जिम्मेदाराना व्यवहार बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ है। अमन की कापियों के पुनर्मूल्यांकन की मांग करते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि 80 प्रतिशत से ज्यादा अंक वाले मेधावियों की कापियों का विशेषज्ञों के पैनल से अवलोकन कराने की व्यवस्था होनी चाहिए। पुनर्मूल्यांकन की व्यवस्था करते हुए त्रुटिपूर्ण मूल्यांकन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ ही बच्चे को मानसिक क्षतिपूर्ति का दंड संबंधित शिक्षक पर लगाया जाए।

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