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'हिमालयी राज्यों को नजरअंदाज न करे केंद्र सरकार'
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 14 Oct 2015 02:27 AM IST
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हिमालय के विकास को लेकर नीति के निर्माण के लिए सभी 12 हिमालयी राज्य केंद्र सरकार पर दबाव बनाएंगे। अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर में हिमालयी राज्यों के विकास को लेकर आयोजित बैठक में शिरकत कर दून लौटे स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि हिमालयी राज्यों का विशेष दर्जा खत्म करने और केंद्रीय योजनाओं के फंडिंग पैटर्न बदलाव करने को चिंताजनक बताया।
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केंद्र बनाए नीति
नेगी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े होने के बावजूद हिमालय राज्यों में सुविधाओं और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में ये गांव खाली हो रहे हैं। केंद्र को ऐसी नीति बनानी चाहिए कि गांवों से पलायन रुके और पर्यावरण का संतुलन भी बना रहे।
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केंद्र ऐसी नीति बनाए जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग कर पाए। इको सेंसिटिव जोन के कारण भी विकास बाधित होने की आशंका है।
केंद्र पर लगाया मदद न करने का आरोप
कहा कि यूपीए ने ग्रीन बोनस को भी सैद्धांतिक मंजूरी दी लेकिन अब भाजपा ने योजना आयोग भंग कर दिया और जो नीति आयोग बनाया उसका कार्यक्षेत्र सुनिश्चित नहीं किया।
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उत्तराखंड का विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर दिया और केंद्र पोषित योजनाओं का फंडिंग पैटर्न बदलने से प्रदेश को सालाना तीन हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। इसकी भरपाई के लिए कोई व्यवस्था केंद्र नहीं कर रहा, जिससे प्रदेश सरकार पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।