Uttarakhand News: कण्वाश्रम रेस्क्यू सेंटर प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ेगी सरकार, चार साल पहले दी थी केंद्र ने मंजूरी
करीब 12 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले मृग विहार के रेस्क्यू सेंटर में तबदील होने से वन विभाग की मुश्किलें काफी हद तक कम हो जाएंगी। वर्ष 2018 में तत्कालीन वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने मृग विहार को मिनी जू और रेस्क्यू सेंटर के रूप में विकसित करने के लिए पहल की थी।
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प्रदेश में मानव वन्यजीव हमलों में लगातार इजाफा हो रहा है। वन्यजीव हिंसक होकर आबादी क्षेत्र में लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं। ऐसे में तमाम क्षेत्रों में हिंसक जानवरों (खासकर बाघ और गुलदार) को पकड़कर रेस्क्यू सेंटर भेजा जाता है। लेकिन, प्रदेश में उपलब्ध रेस्क्यू सेंटर में अब शेड्यूल वन के इन प्राणियों को रखने के लिए जगह ही नहीं बची है। अब सरकार नए रेस्क्यू सेंटर बनाने और पुरानों को विस्तार देने जा रही है।
इस कड़ी में लैंसडौन वन प्रभाग के कण्वाश्रम स्थित मृग विहार को मिनी चिड़ियाघर और रेस्क्यू सेंटर के रूप में विकसित करने के लिए नए सिरे से कवायद शुरू की गई है। करीब 12 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले मृग विहार के रेस्क्यू सेंटर में तबदील होने से वन विभाग की मुश्किलें काफी हद तक कम हो जाएंगी। वर्ष 2018 में तत्कालीन वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने मृग विहार को मिनी जू और रेस्क्यू सेंटर के रूप में विकसित करने के लिए पहल की थी।
उस दौरान इस काम के लिए केंद्र सरकार की ओर से सैद्धांतिक स्वीकृति भी दे दी गई थी। इसके बाद (सीजेडए) केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की ओर से इस मामले में औपचारिकताओं को पूरा के लिए कहा गया था। जो वक्त रहते वन विभाग की ओर से पूरी नहीं की गई। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब वन विभाग की ओर से फिर से मृग विहार को मिनी चिड़ियाघर और रेस्क्यू सेंटर के रूप में विकसित करने के लिए शासन के माध्यम से सीजेडए के साथ पत्राचार शुरू किया गया है।
हाउसफुल हैं तीन रेस्क्यू सेंटर, देहरादून में मात्र दो गुलदार को रखने की जगह
प्रदेश में राजधानी देहरादून में मालसी में स्थित देहरादून जू रेस्क्यू सेंटर को छोड़कर बाकी तीनाें रेस्क्यू सेंटर हाउसफुल चल रहे हैं। यानि अब इन रेस्क्यू सेंटर में एक भी शेड्यूल वन के वन्यजीव प्राणी को रखने की जगह नहीं है। अल्मोड़ा में स्थित चिड़ियाघर में पांच और रेस्क्यू सेंटर में छह कुल 11 गुलदार को रखा गया है। यहां अब अन्य गुलदारों को रखने की जगह नहीं है। इसी तरह से हरिद्वार के चिड़ियापुर में स्थित रेस्क्यू सेंटर में 11 गुलदार को रखा गया है। यह भी हाउसफुल हो चुका है। नैनीताल चिड़ियाघर में स्थित रेस्क्यू सेंटर पहले ही फुल हो चुका है। देहरादून जू स्थित रेस्क्यू सेंटर में एक घायल गुलदार को रखा गया था, जिसे ठीक होने पर अब जंगल में छोड़ दिया गया है। फिलहाल रेस्क्यू सेंटर में एक भी गुलदार नहीं है। वैसे भी यहां मात्र दो ही गुलदार को रखा जा सकता है।
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प्रदेश में रेस्क्यू सेंटर की संख्या बढ़ाए जाने की जरूर लंबे समय से महसूस की जा रही है। कण्वाश्रम रेस्क्यू सेंटर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। मैंने कुछ दिन पहले खुद वहां का दौरा किया था। क्षेत्र के लोगों की मांग भी है। शीघ्र ही इस दिशा में आगे की औपचारिकताओं को पूरा किया जाएगा। - सुबोध उनियाल, वन मंत्री
कण्वाश्रम स्थित मृग विहार को मिनी चिड़ियाघर और रेस्क्यू सेंटर के रूप में विकसित करने के लिए सीजेडए से लगातार बातचीत की जा रही है। शीघ्र ही सीजेडए की टीम मौका मुआयना करने के लिए आएगी। इसके अलावा दूसरे रेस्क्यू सेंटर को विस्तार देने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। - डॉ. समीर सिन्हा, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक