उत्तराखंड: हेड मास्टर ने फर्जी डिग्री से 24 साल तक की सरकारी नौकरी, सेवा समाप्ति के बाद धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज
- बीटीसी के अंकपत्र और प्रमाणपत्र के आधार पर मिली थी नियुक्ति
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उत्तराखंड के रुद्रपुर में बीटीसी के फर्जी अंकपत्र और प्रमाणपत्र के आधार पर 24 साल नौकरी करने के बाद बर्खास्त किए गए प्रधानाध्यापक पर पुलिस ने अब धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है। शिक्षक को गत 20 मार्च को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।
बुधवार को कोतवाली में दी तहरीर में उपशिक्षा अधिकारी डॉ. गुंजन अमरोही ने बताया कि मोहल्ला देवीपुरा काशीपुर निवासी राजेंद्र कुमार की सहायक अध्यापक पद पर 17 अगस्त 1996 को राजकीय प्राथमिक विद्यालय भिलैया खटीमा में बीएसए नैनीताल के आदेश पर नियुक्ति हुई थी।
30 सितंबर 2006 को अपर जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक ऊधमसिंह नगर के आदेश पर उनका स्थानांतरण राप्रावि बिंदुखेड़ा रुद्रपुर और 14 जुलाई 2010 को पदोन्नति के बाद उन्हें राप्रावि भगवानपुर में बतौर प्रधानाध्यापक तैनाती दी गई। छह जुलाई 2015 को राजेंद्र का राप्रावि धरमपुर स्थानांतरण हो गया।
इस दौरान जिले में कुछ शिक्षकों के फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नियुक्ति पाने का मामले सामने आने के बाद धरमपुर स्कूल में तैनाती के दौरान राजेंद्र कुमार के 1992 में किए गए बीटीसी अंकपत्र और प्रमाणपत्रों को सचिव, परीक्षा नियमावली प्राधिकारी प्रयागराज, यूपी ने सत्यापन के लिए डीईओ बेसिक ऊधमसिंह नगर को भेजे। शिक्षकों के खिलाफ कई तरह के नए मामलों का खुलासा हुआ है। जिसकी जांच अभी भी जारी है।
प्रमाणपत्रों में गड़बड़ी की आशंका के चलते डीईओ ने प्रमाणपत्रों की विभागीय जांच करने के बाद 27 जनवरी 2020 को शिक्षक को निलंबित कर उप शिक्षा अधिकारी कार्यालय में संबद्ध कर दिया। साथ ही आरोप पत्र निर्गत कर शिक्षक से लिखित जबाव मांगा गया।
पांच मार्च को शिक्षक ने अपना प्रत्यावेदन डीईओ बेसिक ऊधमसिंह नगर कार्यालय में प्रस्तुत किया। लेकिन सही जवाब नहीं देने पर 20 मार्च 2020 को राजेंद्र कुमार को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। कोतवाल केसी भट्ट ने बताया आरोपी शिक्षक के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 के तहत केस दर्ज कर दिया है। मामले की विवेचना एसआई मनोहर चंद्र को सौंपी गई है।
एसआईटी और विभागीय जांच जारी
फर्जी डिग्रियों से ऊधमसिंह नगर में तीन लोग शिक्षक बन गए थे। तीनों को सेवा से बर्खास्त करने के बाद एसआईटी और विभागीय जांच शुरू कर दी गई थी। इसमें भी तीनों