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कांग्रेस राज में 'चोर, चोर' बने मौसेरे भाई
अजित सिंह राठी/अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 26 Sep 2013 07:38 AM IST
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राज्य आंदोलनकारियों पर चल रहे मुकदमों की वापसी में बेशक 18 साल लगे हों, लेकिन उत्तराखंड के 54 माननीयों के आपराधिक मुकदमे सरकार ने 18 माह में ही वापस कर दिए।
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रोचक बात यह है कि मुकदमों की वापसी में सरकार ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम किया है। ‘तेरे दागी-मेरे दागी, सब भाई-भाई’ की तर्ज पर सरकार ने सत्तापक्ष हो अथवा विपक्ष दोनों दलों के नेताओं को उपकृत किया है। यह खुलासा हुआ है सूचना के अधिकार के तहत डाले गए आवेदन के जरिए।
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गंभीर मामले भी वापस
सरकार ने जिन मुकदमों को वापस लिया है उनमें सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर मुकदमे भी हैं।
सत्ता में आते ही सब साफ
लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत पर विगत विधानसभा चुनाव के वक्त तीन मुकदमे दर्ज हुए, लेकिन मंत्री बनने के कुछ ही दिन बाद वापस हो गए।
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रुड़की के कांग्रेस विधायक प्रदीप बत्रा पर भी आईपीसी के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हुए थे, पर विधायक बनते ही सरकार ने वापस कर लिए। इसी तर्ज पर पूर्व मंत्री तिलकराज बेहड़ के मामले भी वापस हुए।
नामजद ----------- मुकदमा
हरक सिंह रावत - आईपीसी की धारा 147, 353, 506, 171
एसडीएम जखोली ने मंत्री हरक सिंह रावत समेत कई लोगों के खिलाफ सरकारी कामकाज में बाधा डालने व धमकी देने का मुकदमा दर्ज हुआ। 27 अगस्त को शासन ने यह मुकदमा वापस ले लिया।
कुंवर प्रणव सिंह - आईपीसी की धारा 504, 506
वर्ष 2008 में होटल पोलारिस में फायरिंग करने का मुकदमा था।
तिलकराज बेहड़ - आईपीसी की धारा 147, 148, 323, 332, 336,
राजेश शुक्ला - आईपीसी की धारा 147, 427, 352, 504, 506
प्रदीप बत्रा - आईपीसी की धारा 420, 474, 120बी, 34 आदि
अमूमन तौर पर ज्यादातर माननीयों के खिलाफ नीचे दी गई धाराओं में ही मुकदमे दर्ज हुए।
147 148 : बलवा पांच या पांच से अधिक व्यक्ति शामिल हो
353 : सरकारी कर्मचारी के साथ अभद्रता
323 : गाली गलौच
506 : जान से मारने की धमकी
504 : लात घूंसो से मारपीट करना
120बी : योजनाबद्ध तरीके से साक्ष्य मिटाना
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