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सरकार को नहीं आपकी चिंता, डॉक्टरों पर मेहरबान
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 22 Sep 2013 10:22 AM IST
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इलाज के नाम पर प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी रोकने वाले क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट को लागू करने के लिए केंद्र के निर्देश के बावजूद राज्य सरकार ने विधेयक को पटल पर नहीं रखा।
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मंत्रिमंडल से 6 माह पूर्व पारित होने के बावजूद इंडियन मेडिकल काउंसिल और प्राइवेट अस्पतालों के विरोध के चलते सरकार इसे सदन में रखने की हिम्मत नहीं जुटा पाई।
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अधिसूचना 2012 में जारी
अब विधेयक पारित न होने से स्वास्थ्य विभाग को केंद्र से मिलने वाले बजट में कटौती झेलनी पड़ेगी। केंद्र ने क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 की अधिसूचना 2012 में जारी की है।
एक्ट लागू होने से प्राइवेट अस्पतालों के निर्माण से लेकर वहां दी जाने वाली चिकित्सा सेवाओं के संचालन पर स्वास्थ्य विभाग का सीधा दखल रहेगा।
डाक्टर की जवाबदेही सुनिश्चित
मरीज को इलाज न मिल पाने पर डाक्टर की जवाबदेही सुनिश्चित होगी। कई ऐसी कड़ी शर्तें है जिसको लेकर इंडियन मेडिकल काउंसिल सहित प्राइवेट अस्पताल विरोध जता रहे हैं।
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गौरतलब है कि फरवरी में मंत्रिमंडल ने एक्ट को पारित कर दिया था, जिसके बाद दो बार विधानसभा सत्र आयोजित हो चुका है।
बजट कटौती मंजूर, पर डाक्टरों से नाराजगी नहीं
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अप्रैल में एनआरएचएम का बजट जारी करने समय दिशानिर्देश दिए थे कि 6 माह के भीतर क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट को लागू किया जाए। एक्ट को प्रभावी बनाने के लिए केंद्र ने जिलों पर गठित होने वाले प्रकोष्ठों के लिए धनराशि भी बजट में स्वीकृत की है।
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एक्ट लागू होने से क्या होगी व्यवस्था
एक्ट की नियमावली सदन से अधिसूचित होने के बाद स्वास्थ्य विभाग राज्य में मौजूद सभी निजी क्लीनिकों और अस्पतालों का 12 माह के लिए अस्थाई पंजीकरण करेगा। अस्थाई पंजीकरण के बाद जब निजी अस्पतालों का स्थाई पंजीकरण होगा तो उसमें कड़ी शर्तें निहित रहेंगी। जिसमें अस्पतालों में मौजूद सेवाओं, इलाज की दरों से लेकर तैनात मेडिकल और पैरा मेडिकल स्टाफ तक के लिए सख्त मानक रहेंगे।