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इनाम के रूप में रिश्वत दे रहे सरकारी विभाग
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 05 Sep 2014 01:09 PM IST
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चालबाजी में माहिर उत्तराखंड के सरकारी विभागों ने रिश्वत को इनाम का रूप दे दिया है। कोषागार से मनमाने बिल पास कराने के लिए लखाकारों को बाकायदा प्रशंसा पत्र के साथ इनाम दिया जा रहा है।
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विभागों के संबंध में जांच शुरू
लेखाकार इस इनाम का बिल कोषागार से ही पास करा विभाग से मिली धनराशि निकाल लेता है। पिछले साल ऐसा ही एक मामला पकड़ा गया था, लेकिन कलाई खुलने के डर से कोषागार इसे दबा गया है।
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मुख्य कोषाधिकारी जगत सिंह चौहान से इस मामले की आख्या न मिलने पर निदेशक कोषागार एवं वित्त सेवाएं आरसी अग्रवाल ने अब जिलाधिकारी को पत्र लिखा है। साथ ही होमगार्ड्स विभाग से भी जवाब मांगा है। साथ ही अन्य विभागों के संबंध में भी जांच शुरू हो गई है।
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दरअसल होमगार्ड विभाग ने कोषागार के लेखाकार जगदीश कोली को प्रशंसा पत्र के साथ पुरस्कार स्वरूप कुछ धनराशि दी थी। इस इनाम का बिल कोषागार से ही पास हुआ।
मामला सामने आने पर 9 जुलाई 2013 को निदेशक कोषागार और वित्त सेवाएं ने मुख्य कोषाधिकारी से इस इनाम की जानकारी मांगी थी। लेकिन, मुख्य कोषाधिकारी साल भर बाद भी निदेशक के सवालों का जवाब नहीं दिया।
निदेशक ने पूछा था कि लेखाकार को पुरस्कार धनराशि किस नियम और किस मद में दी गई? धनराशि किस आधार पर आहरित की गई? कोषागार देहरादून में कार्यरत और किस कर्मचारी ने अन्य विभागों से ऐसा इनाम लिया है? धनराशि किस सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से आहरित की गई?
अब निदेशक कोषागार एवं वित्त सेवाएं ने जिलाधिकारी चंद्रेश कुमार यादव को पत्र भेजकर इस मामले में जवाब मांगा है। मुख्य कोषाधिकारी को भी इस संबंध में दोबारा पत्र भेजकर संबंधित अभिलेख तुरंत उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। निदेशक ने डिप्टी कमांडेंट जनरल होमगार्डस को मामले की जांच कर रिपोर्ट देने का कहा है।
यह है तरीका
मुख्य कोषाधिकारी अलग-अलग लेखाकारों को विभिन्न विभागों के बिल पास करने की जिम्मेदारी देते हैं। वित्तीय वर्ष पूरा होने पर विभाग लेखाकारों को खुश करने के लिए पुरस्कार धनराशि के नाम पर पैसा देते हैं। अमूमन पुरस्कार धनराशि 5 हजार से 15 हजार के बीच होती है।
मानदेय या पुरस्कार लेना नियमों के खिलाफ है। राजकोष से पैसा कैसे निकाला गया? अभी इस मामले की जांच चल रही है। - जगत सिंह चौहान, मुख्य कोषाधिकारी देहरादून
सरकारी काम करने पर एक विभाग दूसरे विभाग को कैसे पुरस्कार धनराशि दे सकता है। जवाब देने के लिए मुख्य कोषाधिकारी को दुबारा पत्र लिखा है। खुद ही बिल बनाना और खुद ही पास करना, यह गलत तरीका है। काम के बदले मानदेय लेना गलत है। मामला गंभीर है। अन्य विभागों के संबंध में जांच कराई जा रही है।
- आरसी अग्रवाल, निदेशक कोषागार एवं वित्त सेवाएं