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मैडम ने याद दिला दी 'साहब' को औकात
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 27 Jul 2015 07:04 PM IST
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शासन में नई मैडम की एंट्री को हल्के में लिया जा रहा था। धीरे-धीरे मैडम की धमक बढ़ने लगी और शासन में पिछले दिनों इन्हें जन कल्याण से जुड़ा विभाग मिला गया।
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सबने सोचा कि कोई दिक्कत नहीं होगी, क्योंकि मैडम के ऊपर भी कोई है। धमक और प्रोटोकाल से जुड़ा मामला दो दिन पहले सामने आ गया। महकमे के एचओडी भी खुद को तुर्रम समझते थे। यह वाक्या उस वक्त का है जब सचिवालय के ही एक कक्ष में कुछ बड़े ब्यूरोक्रेट्स बैठे थे।
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इसी बीच सीनियर ने मैडम को किसी विषय पर नोट बनाने को कहा। मैडम ने एचओडी को नोट बनाने के लिए कहा तो एचओडी ने पलटकर कहा कि आपको कहा है तो आप ही बना दीजिए। इस पर मैडम ने गुर्दन घुमाई और एचओडी को अपने अंदाज में कहा कि शाम चार बजे तक नोट तैयार होकर टेबल पर होना चाहिए, समझे।
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एचओडी भी मौके की नजाकत समझ गए और कहा, यैस मैडम। तेजी से गया और नोट तैयार कर ले आया। वैसे ये साहब बहुत सीनियर अफसरों के फोन भी पिक नहीं करते है।
...कमजोर नेटवर्क
डिजिटल इंडिया के इस दौर में कमजोर नेटवर्क को अक्षम्य ही माना जाएगा। पर स्टिंग ऑपरेशन में फंसे अधिकारी के निलंबन की खबर पर देहरादून के मुख्यमंत्री आवास का यही कमजोर नेटवर्क कांग्रेस के लिए तारणहार बना हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक दिल्ली से आलाकमान ने मुख्यमंत्री से पुष्टि करने के बाद ही उक्त अधिकारी के निलंबन का बयान देने के लिए कांग्रेस केप्रवक्ताओं को कहा गया था। पर मुख्यमंत्री हरीश रावत के इनकार के बाद यह मामला उलझ गया। दिल्ली के कांग्रेस नेता कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री पलट गए।
उधर मुख्यमंत्री के नजदीकि लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री आवास का कमजोर नेटवर्क इसके लिए जिम्मेदार है। दिल्ली से पूछा गया था। मुख्यमंत्री जब तक पूरा जवाब दे पाते तब तक नेटवर्क कट गया।
लिहाजा दिल्ली में बैठे नेताओं ने मान लिया कि निलंबन हो गया है। दूसरी ओर कांग्रेस का एक धड़ा यह भी कह रहा है कि पहले मुख्यमंत्री ने हामी भरी थी पर बाद में मौके की नजाकत को देखकर पलटी मार ली। अधिकारी से ही लिखवाया गया कि पद छोड़ रहा हूं और काम चला लिया गया।