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हमें तो कुछ नहीं मिलता था...
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 15 Dec 2014 02:22 PM IST
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परेड ग्राउंड में इन दिनों खेल प्रतियोगिताएं चल रही हैं। जीतने वाले खिलाड़ियों को नेशनल के लिए भी जाना है।
मगर खिलाड़ी जाएंगे कैसे यह अभी तक तय नहीं हो पाया है। इस बीच कुछ खिलाड़ी आए और युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों से पूछने लगे कि सर हम कैसे जाएंगे मैच खेलने।
अभी तक तो टिकट की कनफर्म नहीं हो सके हैं। तो अधिकारियों ने कहा कि बेटा हो जाएगा इंतजाम, हम हैं न कुछ न कुछ कर लेंगे। मगर इसी बीच एक महाशय बोल पड़े क्या होगा इंतजाम बोलिए।
हम भी खेलने जाते थे, हमे तो कभी सुविधा नहीं मिली। न बैठने को सीट मिलती थी, न सोने को बिस्तर। दूसरा बोला भाई अब समय बदल गया है, तो वो महाशय फिर बोल पड़े क्या समय बदला है, हमें तो अभी भी कुछ नहीं मिलता।
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मगर खिलाड़ी जाएंगे कैसे यह अभी तक तय नहीं हो पाया है। इस बीच कुछ खिलाड़ी आए और युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों से पूछने लगे कि सर हम कैसे जाएंगे मैच खेलने।
अभी तक तो टिकट की कनफर्म नहीं हो सके हैं। तो अधिकारियों ने कहा कि बेटा हो जाएगा इंतजाम, हम हैं न कुछ न कुछ कर लेंगे। मगर इसी बीच एक महाशय बोल पड़े क्या होगा इंतजाम बोलिए।
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हम भी खेलने जाते थे, हमे तो कभी सुविधा नहीं मिली। न बैठने को सीट मिलती थी, न सोने को बिस्तर। दूसरा बोला भाई अब समय बदल गया है, तो वो महाशय फिर बोल पड़े क्या समय बदला है, हमें तो अभी भी कुछ नहीं मिलता।
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