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स्वर्णिम विजय दिवस : 1971 भारत-पाक युद्ध में उत्तराखंड के 255 जवानों ने दी थी शहादत

Fri, 17 Dec 2021 01:09 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 17 Dec 2021 01:09 AM IST
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Golden Victory Day: 255 soldiers of Uttarakhand gave martyrdom in the 1971 Indo-Pak war
वर्ष 1971 का भारत पाक युद्ध में उत्तराखंड के रणबांकुरों के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। इस युद्ध में राज्य के 255 रणबांकुरों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए कुर्बानी दी थी। रणभूमि में दुश्मन से मोर्चा लेते राज्य के 78 सैनिक गंभीर रूप से घायल भी हुए थे। जंग में दुश्मन को धूल चटाने वाले राज्य के 74 जांबाजों को वीरता पदक से भी नवाजा गया था।
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उत्तराखंड को यूं ही वीर भूमि नहीं कहा जाता है। आजादी के लिए हो या आजादी के बाद उत्तराखंड के रणबांकुरों ने हमेशा से हमेशा से युद्ध भूमि में अपना लोहा बनवाया। 1971 भारत-पाक युद्ध जिसे इस बार स्वर्णिम विजय वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इस युद्ध में भी उत्तराखंड के वीर जवानों का काफी योगदान रहा है। इस युद्ध उत्तराखंड के 255 जवानों ने मातृभूमि के लिए अपने न्यौछावर किए थे। जबकि 78 सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गए थे।युद्ध के बाद उत्तरधाखंड के 74 जांबाजो को वीरता पदक से भी नवाजा गया था। भारतीय सेना के तत्कालीन सेनाध्यक्ष सैम मानेक शा (बाद में फील्ड मार्शल) व बांग्लादेश में सेना की पूर्वी कमान का नेतृत्व करने वाले तत्कालीन सैन्य कमांडर ले. जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा ने भी प्रदेश के वीर जवानों के साहस को सलाम किया था।
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आईएमए में सुरक्षित है किस्तानी सेना के जनरल नियाजी की पिस्टल व काफी टेबल बुक है
देहरादून। 16 दिसंबर को पाकिस्तान सेना के लेफ्टिनेंट जनरल एएके नियाजी ने अपने 90 हजार से अधिक सैनिकों के साथ भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के सामने आत्मसमर्पण किया था। इस दौरान जनरल नियाजी ने अपनी पिस्टल जनरल अरोड़ा को सौंप दी थी। यह पिस्टल देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) के म्यूजियम में आज भी रखी हुई है। इसे जनरल अरोड़ा आईएमए के गोल्डन जुबली वर्ष 1982 में आईएमए को प्रदान की थी। इसी युद्ध से जुड़ी दूसरी निशानी एक पाकिस्तानी ध्वज है जो आईएमए के म्यूजियम में उल्टा लटका हुआ है। इस ध्वज को भारतीय सेना ने पाकिस्तान की 31 पंजाब बटालियन से सात से नौ सितंबर तक चले सिलहत युद्ध के दौरान कब्जे में लिया था। भारत पाकिस्तान के बीच 1971 में हुए युद्ध की एक अन्य निशानी जनरल नियाजी की काफी टेबल बुक भी आईएमए में मौजूद है। यह निशानी कर्नल (रिटायर्ड) रमेश भनोट ने 28 वर्ष बाद जून 2008 में आईएमए को सौंपी थी।
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