विश्व प्रसिद्घ फूलों की घाटी में गोल्डन फर्न का अटैक, ये हो गया हाल
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फूलों की घाटी में पॉलीगोनम के बाद अब गोल्डन फर्न ने अपनी जड़ें जमा दी हैं। बामण धोड़ से पिकनिक स्पॉट तक घाटी में गोल्डन फर्न फैल गया है।
घाटी में जहां रंग-बिरंगे फूल दिखते थे, वहां अब गोल्डन फर्न दिखाई दे रहा है। हालांकि, पार्क के अधिकारी घाटी में गोल्डन फर्न का दायरा सीमित बता रहे हैं। फिर भी इसके उन्मूलन के लिए प्रपोजल तैयार किया जा रहा है।
वहीं, नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन प्रतिवर्ष पॉलीगोनम को उखाड़ने में पांच लाख रुपये खर्च कर रहा है। गोल्डन फर्न का पौधा करीब आधा मीटर का होता है। इसके पत्ते चौड़े और हल्के पीले रंग के होते हैं। यह अपने इर्द-गिर्द फूलों को पनपने नहीं देता है।
फूलों के बजाय गोल्डन फर्न से घिरी है कब्र
चार जुलाई 1939 को फूलों की घाटी पर रिसर्च करने पहुंची इंग्लैंड की जोन मेरी की घाटी में ग्लेशियर के नीचे दबने से मौत हो गई थी। यहां मेरी की कब्र बनाई गई है, जिसे देखने के लिए विदेशी पर्यटक यहां पहुंचते हैं।
पूर्व में कब्र के इर्द-गिर्द विभिन्न प्रजाति के फूल खिले रहते थे, लेकिन अब फूलों के बजाय कब्र चारों ओर गोल्डन फर्न से ढक गया है।
जोशीमठ नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के डीएफओ चंद्रशेखर जोशी ने बताया कि फूलों की घाटी में गोल्डन फर्न चिंताएं बढ़ा रहा है। पार्क प्रशासन का ध्यान अभी घाटी से पॉलीगोनम के उन्मूलन पर है। घाटी में गोल्डन फर्न के सर्वेक्षण के बाद इसके उन्मूलन के लिए भी प्रपोजल तैयार किया जाएगा।