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ब्लड शुगर के मरीज को चढ़ा दिया ग्लूकोज

Fri, 12 Feb 2016 02:51 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 12 Feb 2016 02:51 PM IST
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glucose drip to blood sugar patients.

सैन्य अस्पताल देहरादून में उपचार में लापरवाही से हुई युवक की मौत के मामले में जिला उपभोक्ता फोरम ने पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपये हर्जाना एवं 15 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में देने का फैसला सुनाया है।

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मामले में सचिव रक्षा मंत्रालय, अस्पताल और लेफ्टिनेंट कर्नल डा. एके राजपूत को आरोपी बनाया गया था। फोरम ने अपने फैसले में कहा कि मरीज का ब्लड शुगर चैक किए बगैर ही उसे ग्लूकोज (डीएनएस) चढ़ाया गया और उपचार में लापरवाही की गई। फोरम ने अपने फैसले में कहा कि प्रकरण में कितनी भी धनराशि क्यों न प्रदान करा दी जाए जीवन हानि की भरपाई नहीं हो सकती।
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ओल्ड सर्वे रोड देहरादून निवासी किशन सिंह ने जिला उपभोक्ता फोरम में की शिकायत में कहा कि वह भूतपूर्व सैनिक हैं, उनके सबसे छोटे बेटे अजय सिंह (22 वर्ष) का सैन्य अस्पताल में उपचार चल रहा था। अजय को 29 नवंबर वर्ष 2007 को उपचार के लिए एमएच में भर्ती कराया गया, लेकिन उपचार में लापरवाही के चलते 30 नवंबर को उसकी मौत हो गई।
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युवक के पिता ने कहा कि अस्पताल में डॉक्टरों ने उसके बेटे की स्वास्थ्य की जांच किए बगैर ही उसे ग्लूकोज बढ़ा दिया। शरीर में ग्लूकोज की मात्रा अधिक होने से उसकी मौत हो गई। मामले में सचिव रक्षा मंत्रालय, सैन्य अस्पताल देहरादून, लेफ्टिनेंट कर्नल डा. अजय लाम्बा, लेफ्टिनेंट कर्नल डा. एके राजपूत को आरोपी बनाया गया।

फोरम में हुई सुनवाई में सैन्य अस्पताल की ओर से कहा गया कि परिवादी (पूर्व सैनिक) व उसके परिजन सैन्य अस्पताल में निशुल्क इलाज के पात्र हैं। उनको यह लाभ ईसीएचएस के तहत मिल रहा है। पूर्व सैनिक के पुत्र का 1999 से यहां इलाज चल रहा था। उचित उपचार के बावजूद उसकी हालत गिरती चली गई।

ब्लड शुगर चैक किए बगैर उसे ग्लूकोज नहीं दिया गया, वही लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. अजय लांबा ने कहा कि उन्होंने युवक का इलाज नहीं किया, युवक को ओपीडी में लाया गया था, जहां उसकी स्थिति को देखते हुए उन्होंने मरीज को डॉ.राजपूत को सुपुर्द कर दिया।

पूर्व सैनिक की ओर से मामले की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता केके गोयल ने कहा कि अस्पताल ने युवक की उपचार में घोर लापरवाही की, युवक का बुखार, बीपी और शूगर की जांच नहीं की गई। उसकी जांच किए बगैर उसे ग्लूकोज चढ़ाया गया। ग्लूकोज से पहले उसे उसकी शुगर की जांच होनी चाहिए थी।


प्रकरण में लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. अजय लांबा को दोषी नहीं माना गया। सभी पक्षों को सुनने के बाद जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष बलवीर प्रसाद और सदस्य अलका नेगी ने माना की युवक के उपचार में लापरवाही हुई।

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