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वैश्विक आपदा प्रबंधन सम्मेलन: ईको- डिजास्टर एंड रिस्क रिडक्शन को भविष्य की चिंताओं में करना होगा शामिल

Wed, 29 Nov 2023 09:45 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 29 Nov 2023 09:45 PM IST
सार

प्रथम सत्र की अध्यक्षता नेपाल के प्रधानमंत्री के पूर्व सलाहकार डॉ. माधव बी कार्की ने की। उन्होंने बढ़ते तापमान पर चिंता जताई।

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Global Disaster Management Conference in Dehradun Eco-disaster reduction will be included in future concerns
वैश्विक आपदा प्रबंधन सम्मेलन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देहरादून में आयोजित चार दिवसीय आपदा प्रबंधन विश्व सम्मेलन के दूसरे दिन वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने डिजास्टर मैनेजमेंट के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। पहले सत्र में ईको-डिजास्टर एवं रिस्क रिडक्शन पर बात हुई। वहीं दूसरे सत्र में राष्ट्रीय एवं वैश्विक जन स्वास्थ्य आपातकालीन और आपदा न्यूनीकरण पर चर्चा की गई।

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प्रथम सत्र की अध्यक्षता नेपाल के प्रधानमंत्री के पूर्व सलाहकार डॉ. माधव बी कार्की ने की। उन्होंने बढ़ते तापमान पर चिंता जताई। उन्होंंने कहा कि ईको- डिजास्टर एंड रिस्क रिडक्शन के माध्यम से भविष्य में होने वाले आपदाओं को और करीब से समझकर उसका समाधान किया जा सकता है। वहीं पैनल डिस्कशन के सह अध्यक्ष, पूर्व मुख्य सचिव डॉ. एन रविशंकर ने मनुष्य और मशीन का समन्वय बनाने और एक-दूसरे की आवश्यकताओं और नव निर्माण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा आपदा के समय पर मनुष्य का मुख्य सहयोगी मशीन ही होता है।

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डॉ. प्रिया नारायण ने इंपेक्ट ऑफ क्लाइमेट चेंज इन इंडिया पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पर्यावरण में बदलाव किसी खास राज्य की बात नहीं है, यह सब अब पूरे भारत के जलवायु परिवर्तन में दिख रहा है। डॉ. हामान उनुसा ने कहा कि पर्यावरण में बदलाव और आपदा का असर कृषि भूमि पर सबसे अधिक हो रहा है। अब यह कृषि भूमि का मुद्दा दुनिया के लिए चिंता का विषय बन चुका है। कृतिमान अवस्थी ने कहा कि पंचायत स्तर पर भी लोगों को कैपेसिटी बिल्डिंग और ट्रेनिंग की जरूरत है, जो आपदा के खतरे को कम कर सकता है।

डॉ. हरीश बहुगुणा ने लैंडस्लाइड और उसके होने वाले खतरों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाएं पूरे इको सिस्टम पर असर डालती हैं। डॉ. शालिनी ध्यानी ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि हम देख सकते हैं की पहाड़ी क्षेत्रों में क्लाइमेट चेंज का असर बहुत तेजी से हो रहा है। यह ईको सिस्टम और बायोडायवर्सिटी के अध्ययन से ही पता चलता है कि इससे कितना नुकसान हो रहा है। हम देख सकते हैं कि पहाड़ों में कई तरह के जीव जंतु विलुप्त होने के कगार पर हैं। इसका एकमात्र कारण पर्यावरण में बदलाव ही है।

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