पहल हुई तो रूढ़ियों को तोड़ परिजनों ने बढ़ाए कदम, अब यहां पीरियड्स में भी स्कूल जा सकेंगी बेटियां
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रूढ़ियों से घिरे इस गांव में अब बेटियों के साथ भेदभाव नहीं होगा। मासिक धर्म के दौरान भी बेटियां अब स्कूल जा सकेंगी। पिथौरागढ़ के मूनाकोट विकासखंड के कुछ सीमावर्ती गांवों में माहवारी के दिनों में छात्राओं को स्कूल नहीं जाने देने की परंपरा को तोड़ने के लिए अब प्रशासन भी जागा है।
खुद गांव वाले भी कह रहे हैं कि बेटियों को स्कूल जाने से नहीं रोका जा रहा है। मंगलवार को एसडीएम एसके पांडेय की अध्यक्षता में सल्लाचिंगरी पहुंची टीम में शामिल सदस्यों ने छात्राओं, अभिभावकों से वार्ता की और उनसे अनुरोध किया कि यदि कोई ऐसी परंपरा है तो इससे बचा जाना चाहिए।
सल्लाचिंगरी इंटर कॉलेज में हुई बातचीत में ग्रामीणों, छात्राओं ने एसडीएम को बताया कि मंदिर के रास्ते के अलावा स्कूल जाने के लिए दो रास्ते बने हैं। साथ ही अब सड़क भी विद्यालय तक पहुंच गई है।
अधिकारियों को अभिभावकों ने बताया कि छात्राओं को विद्यालय जाने से नहीं रोका जाता है। हो सकता है कि पूर्व में ऐसी कोई परंपरा रही हो, लेकिन वर्तमान में यह अब नहीं है। इस दौरान टीम ने अभिभावकों, छात्राओं की काउंसलिंग करते हुए कहा कि अच्छी बात है कि ग्रामीण रूढ़िवादी परंपराओं को तोड़ आगे बढ़ रहे हैं।
टीम ने बेटियों को बचाने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए भी ग्रामीणों को प्रेरित किया। टीम में मुख्य शिक्षाधिकारी बीपी सिमल्टी, डीपीओ आईसीडीएस राधिक ह्यांकी, निर्भया प्रकोष्ठ की सदस्य आदि शामिल रहे।