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देहरादून: पेपर लीक ने कर दिया बर्बाद, नौकरी मिली नहीं अब है शादी का दबाव
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- बेरोजगारों के आंदोलन में प्रदर्शन कर रहीं लड़कियों ने भावुक होकर बताई समस्याएं
सरकारी नौकरियों में धांधली के खिलाफ आंदोलन में युवतियां भी बढ़-चढ़कर भाग ले रही हैं। उनका कहना है कि बड़ी मुश्किल से घरवालों ने बाहर जाकर पढ़ाई की इजाजत दी। यहां कोचिंग करके सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे हैं। परीक्षाएं भी देते हैं लेकिन अंत में पता चलता है कि परीक्षा का पेपर ही लीक हो गया। ऐसे करते हुए कई साल निकल गए। अब समय नहीं बचा है और घरवाले शादी का दबाव बना रहे हैं।
उनका कहना है कि बचपन से सपना था कि सरकारी नौकरी करनी है। परिवार का खर्च, छोटे भाई बहनों की पढ़ाई करवानी है। एक बेटी होने के नाते किसी से पैसों के लिए हाथ न फैलाना पड़े। घरवालों से दो साल का समय मांगा था। अब उनकी बातें भी सुननी पड़ रही हैं। सरकार की कमियों का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। पिछला समय तो खराब हो गया और वह वापस नहीं आ सकता लेकिन दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
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- हमारा वक्त खराब हुआ और मेहनत भी -
स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की उपाध्यक्ष सोनाली नेगी (23) डीएवी कॉलेज से लॉ कर रही हैं। सोनाली कहती हैं कि हम लोग मध्यम वर्गीय परिवार से आते हैं। हम बचपन से सोचते हैं कि सरकारी नौकरी करनी है। इसी उम्मीद में हम लोग पढ़ाई करते हैं। हमने शहर आकर कोचिंग की। दो बार पटवारी की परीक्षा दी, दोनों बार पेपर लीक हो गया। हमारा समय और मेहनत खराब हुई। किसकी वजह से पेपर लीक होता है उसकी जांच होनी ही चाहिए।
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अब टूटने लगा है हौसला
देहरादून निवासी अपने घर में सबसे बड़ी अनुजा (27) कहती हैं कि उन्होंने यूकेपीसीएस अपर, लोअर, हाईकोर्ट, आरओ, एआरओ और पटवारी की परीक्षा दी है। इसमें पटवारी की परीक्षा अच्छी हुई थी लेकिन पता चला कि पेपर लीक हो गया। अनुजा हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय (एचएनबीजीयू) से समाज शास्त्र में गोल्ड मेडलिस्ट भी हैं। उनका कहना है कि ऐसे में हौसला भी टूट रहा है।
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- गोल्ड मेडलिस्ट होने के बाद भी नौकरी को भटक रहे -
देहरादून निवासी आकांक्षा जोशी (29) ने विधानसभा की परीक्षा दी थी। विधानसभा का रिजल्ट नहीं आया। बिना रिजल्ट के ही नियुक्तियां हो गईं और मामला कोर्ट तक पहुंच गया। आकांक्षा कहती हैं कि रिजल्ट आने के बाद ही नियुक्ति होती तो एक संतुष्टि रहती है कि हम परीक्षा पास नहीं कर पाए। लेकिन, यहां तो नियुक्तियां ही बिना रिजल्ट के हो गईं। आकांक्षा हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय (एचएनबीजीयू) से लॉ में गोल्ड मेडलिस्ट हैं।
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सीबीआई जांच है जरूरी
देहरादून निवासी मीनाक्षी (25) ने बताया कि उनका फॉरेस्ट गार्ड में 2.77 अंक से चयन रुक गया था। इसके बाद पटवारी की परीक्षा दी और पटवारी में 79.75 प्रतिशत नंबर आए लेकिन रिजल्ट नहीं आया। इसके बाद पुलिस परीक्षा में 165 नंबर आए लेकिन नाम नहीं शामिल किया गया। इन सभी परीक्षाओं में बहुत बड़ा खेल हुआ है। इनकी जांच बहुत जरूरी है।
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सरकारी नौकरियों में धांधली के खिलाफ आंदोलन में युवतियां भी बढ़-चढ़कर भाग ले रही हैं। उनका कहना है कि बड़ी मुश्किल से घरवालों ने बाहर जाकर पढ़ाई की इजाजत दी। यहां कोचिंग करके सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे हैं। परीक्षाएं भी देते हैं लेकिन अंत में पता चलता है कि परीक्षा का पेपर ही लीक हो गया। ऐसे करते हुए कई साल निकल गए। अब समय नहीं बचा है और घरवाले शादी का दबाव बना रहे हैं।
उनका कहना है कि बचपन से सपना था कि सरकारी नौकरी करनी है। परिवार का खर्च, छोटे भाई बहनों की पढ़ाई करवानी है। एक बेटी होने के नाते किसी से पैसों के लिए हाथ न फैलाना पड़े। घरवालों से दो साल का समय मांगा था। अब उनकी बातें भी सुननी पड़ रही हैं। सरकार की कमियों का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। पिछला समय तो खराब हो गया और वह वापस नहीं आ सकता लेकिन दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
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- हमारा वक्त खराब हुआ और मेहनत भी -
स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की उपाध्यक्ष सोनाली नेगी (23) डीएवी कॉलेज से लॉ कर रही हैं। सोनाली कहती हैं कि हम लोग मध्यम वर्गीय परिवार से आते हैं। हम बचपन से सोचते हैं कि सरकारी नौकरी करनी है। इसी उम्मीद में हम लोग पढ़ाई करते हैं। हमने शहर आकर कोचिंग की। दो बार पटवारी की परीक्षा दी, दोनों बार पेपर लीक हो गया। हमारा समय और मेहनत खराब हुई। किसकी वजह से पेपर लीक होता है उसकी जांच होनी ही चाहिए।
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अब टूटने लगा है हौसला
देहरादून निवासी अपने घर में सबसे बड़ी अनुजा (27) कहती हैं कि उन्होंने यूकेपीसीएस अपर, लोअर, हाईकोर्ट, आरओ, एआरओ और पटवारी की परीक्षा दी है। इसमें पटवारी की परीक्षा अच्छी हुई थी लेकिन पता चला कि पेपर लीक हो गया। अनुजा हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय (एचएनबीजीयू) से समाज शास्त्र में गोल्ड मेडलिस्ट भी हैं। उनका कहना है कि ऐसे में हौसला भी टूट रहा है।
- गोल्ड मेडलिस्ट होने के बाद भी नौकरी को भटक रहे -
देहरादून निवासी आकांक्षा जोशी (29) ने विधानसभा की परीक्षा दी थी। विधानसभा का रिजल्ट नहीं आया। बिना रिजल्ट के ही नियुक्तियां हो गईं और मामला कोर्ट तक पहुंच गया। आकांक्षा कहती हैं कि रिजल्ट आने के बाद ही नियुक्ति होती तो एक संतुष्टि रहती है कि हम परीक्षा पास नहीं कर पाए। लेकिन, यहां तो नियुक्तियां ही बिना रिजल्ट के हो गईं। आकांक्षा हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय (एचएनबीजीयू) से लॉ में गोल्ड मेडलिस्ट हैं।
सीबीआई जांच है जरूरी
देहरादून निवासी मीनाक्षी (25) ने बताया कि उनका फॉरेस्ट गार्ड में 2.77 अंक से चयन रुक गया था। इसके बाद पटवारी की परीक्षा दी और पटवारी में 79.75 प्रतिशत नंबर आए लेकिन रिजल्ट नहीं आया। इसके बाद पुलिस परीक्षा में 165 नंबर आए लेकिन नाम नहीं शामिल किया गया। इन सभी परीक्षाओं में बहुत बड़ा खेल हुआ है। इनकी जांच बहुत जरूरी है।