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तंगहाली में बेहतर शिक्षा दिला रहे बाप का सपना टूटा
अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Wed, 08 Jan 2014 12:31 PM IST
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हरिद्वार के पथरी क्षेत्र में दरिंदों ने 13 वर्षीय छात्रा की दुराचार के बाद गला घोटकर जान तो ले ली, लेकिन उसके गरीब पिता का सपना भी टूट गया।
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दिहाड़ी मजदूरी करने वाले पिता का सपना टूटा
दिहाड़ी मजदूर पिता का सपना था कि उनकी लाडली पढ़ लिख कर परिवार का नाम रोशन करेगी। लेकिन सपना अधूरा रह गया। तीन पुत्र होने के बावजूद पिता की उम्मीदें मेधावी लाडली से जुड़ी थी। पलभर में उनके सभी अरमान चकनाचूर हो गए।
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रोजमर्रा की दिहाड़ी कर परिवार का भरण पोषण करने वाले पिता ने सोचा भी नहीं होगा कि ये उसकी लाडली से आखिरी मुलाकात होगी।
लाड प्यार में पली बढ़ी थी मासूम
घर चलाने में पत्नी भी हाथ बंटाती थी, लेकिन मंगलवार को वह दिहाड़ी पर नहीं गई। बेटी के दुनिया को अलविदा कह देने की खबर भूचाल से कम नहीं थी। जिला अस्पताल कैंपस में खडे़ पिता की आंख से आंसू सूख चुके थे।
केवल सिसकियां बाकी थी। परिवार को हौसला देने का भी इनमें जोश नहीं रह गया था। सुबकते हुए पिता ने केवल इतना बोला कि इकलौती बेटी लाड प्यार में पली बढ़ी थी। अपने से दूर कर हॉस्टल में भेजने की वजह भी यही थी कि बेटी काबिल बनेगी।
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रोती बिलखती मां व बडे़ भाई को ग्रामीण संभालने में जुटे थे। हर किसी की जुबां से दरिंदों के लिए फांसी के बोल फूट रहे थे।
बहन देख, तेरा भइया खड़ा है
बहन एक बार आंखें खोल दे। देख तेरा भइया खड़ा है। तू उठती क्यों नहीं। ये शब्द उस भाई के थे जो अपनी बहन के जिंदा बचने की उम्मीद से महिला अस्पताल लेकर पहुंचा था। लेकिन उसे मालूम नहीं था कि उसकी लाडली बहन हमेशा के लिए खामोश हो गई है।
गन्ना तोल केंद्र पर उठाई उंगली
जिला अस्पताल कैंपस में पुलिस अधिकारियों के सामने ग्रामीणों ने गन्ना तोल केंद्र पर उंगली उठाई है। ग्रामीण बोले कि, गन्ना तोल केन्द्र पर बाहरी व्यक्ति अक्सर आते जाते हैं। घटनास्थल से भी चंद कदम की दूरी पर तोल केन्द्र है।
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बचाव में बच्ची चीखी चिल्लाई भी होगी, ऐसे में तोल केन्द्र पर किसी ने आवाज न सुनी हो ये असंभव है। सीओ चन्द्रमोहन सिंह ने तुरन्त गन्ना तोल केन्द्र पर सुबह से आए गए हर व्यक्ति को हिरासत में लेने के निर्देश दिए।
संघर्ष किया होगा मासूम ने
घटनास्थल संघर्ष की दास्ता बयां कर रहा है। शौच के स्थान पर मासूम की चप्पल इधर उधर पड़ी थी। उससे करीब सौ कदम दूर गन्ने के खेत से लाश मिली है। साफ है कि मासूम ने कातिलों की मंशा भांप विरोध भी किया होगा।
काश पहले मिल गई होती तो बच जाती जान
सुबह साढे़ आठ बजे करीब मासूम के न लौटने पर परिजन चेते। परिजनों ने ग्रामीणों की मदद से मासूम की खोजबीन शुरु कर दी, पर वे खोजबीन के चक्कर में खेतों के अंदरुनी हिस्से में पहुंच गए जबकि मासूम का शव खेत की शुरुआत में ही पड़ा था।
सुबकते हुए भाई व अन्य ग्रामीण युवकों के पांव मिट्टी से सने थे। पूछने पर बोले कि, वे किशोरी को गन्ने के खेत के अंदर खोजते रहे। करीब दो घंटे बाद शव उन्हें खेत की शुरुआत से ही मिला। वे बार बार यही बोलते रहे कि यदि किशोरी को पहले ढूंढ लिया होता तब उसकी जान बच जाने के पूरे आसार थे।
बारी बारी से पहुंचते रहे अफसर
घटनास्थल पर बारी बारी से अफसर पहुंचते रहे। सीओ कनखल चन्द्रमोहन सिंह नेगी बालिका के शव को लेकर महिला अस्पताल पहुंचे ही थी। फिर एसपी सिटी सुरजीत सिंह पंवार घटनास्थल पहुंचे।
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होमीसाइड सेल ने भी घटनास्थल का गहनता से निरीक्षण किया। दोपहर डेढ़ बजे एसएसपी राजीव स्वरुप ने जायजा लिया। फिर डीआईजी रेंज अमित सिन्हा भी पहुंच गए। डीआईजी ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और ग्रामीणों से भी बातचीत कर हालात सामान्य करने की कोशिश की।
पोस्टमार्टम न कराने की मांग पर अडे़
छात्रा की मौत के बाद भाई व उसके दोस्त पोस्टमार्टम न कराने की मांग पर अड़ गए। पर, बाद में पुलिस अधिकारियों के समझाने बुझाने पर वे पोस्टमार्टम के लिए राजी हुए।
दून तक हुई हत्याकांड की गूंज
दुस्साहसिक हत्याकांड से पूरा पुलिस महकमा भी दहल उठा। हरिद्वार पुलिस की लचर कार्यशैली से खफा डीआईजी रेंज अमित सिन्हा को यहां पहुंचना पड़ा। एसएसपी डेढ़ बजे गांव पहुंचे। उनसे चंद मिनटों बाद ही देहरादून से डीआईजी यहां आ गए थे।