'माँ मैं बहुत परेशान हूं, अब नहीं जीना चाहती', कहकर बेटी ने खुद को मार डाला
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एक लड़की ने अपनी माँ को फोन किया और कहा 'माँ मैं बहुत परेशान हूं, अब नहीं जीना चाहती'। इसके बाद उसने खुद को मौत की नींद सुला लिया। बेटी की आवाज सुनकर माँ के पैरों तले जमीन खिसक गई। अंतिम समय में बेटी की गई बातों को याद कर मां अभी तक सदमे में है।
अधिशासी अभियंता गिरीश चंद्र तिवारी की बेटी रश्मि तिवारी ने मौत से पहले अपनी मां से फोन पर बात की थी। उसने तनाव होने की बात कहकर मौत को गले लगाने की बात कही थी। मां ने उसे काफी समझाया मगर वह अपनी जिद पर अड़ी रही।
गिरीश चंद्र तिवारी ने बताया कि बेटी सास के व्यवहार से काफी परेशान थी। घटना के चंद मिनट पहले ही उसने अपनी मां को फोन किया था। वह कह रही थी कि अब तनाव नहीं सहा जा सकता।
गिरीश चंद्र के अनुसार जब पत्नी ने उन्हें यह बात बताई तो वह परेशान हो गए। उन्होंने बेटी को समझाने के लिए कॉल की मगर उसका फोन नहीं उठा। इससे वह और परेशान हो गए। अनहोनी की आशंका के चलते उन्होंने पुलिस को फोन किया।
शव और भ्रूण को ससुर के सुपुर्द किया
रश्मि तिवारी के शव का पोस्टमार्टम सोमवार को किया गया। पोस्टमार्टम हाउस में दोनों पक्षों में तनातनी देखी गई। एक दूसरे से बातचीत तक नहीं हुई। बाद में तहसीलदार ने रश्मि के जेवर और शव के साथ नौ महीने के भ्रूण ससुर को सुपुर्द किया।
पॉलीशीट निवासी गिरीश चंद्र तिवारी की पत्नी रश्मि तिवारी के शव का पोस्टमार्टम कराने से पहले तहसीलदार ने पुलिस के सहयोग से पंचनामा भरना शुरू किया। तहसीलदार रश्मि के जेवरात को सुपुर्द कराना चाहते थे लेकिन रश्मि के पिता अभियंता गिरीश चंद्र जोशी यह तय नहीं कर पा रहे थे कि जेवर कौन लेगा।
अंत में राय मशविरे के बाद ससुरालियों को जेवर देने पर तैयार हुए। वह किसी प्रकार पंचनामे का कागजात तैयार होने पर डॉक्टरों के पैनल ने शव का पोस्टमार्टम किया।
पुलिस ने शव के साथ नौ महीने के भ्रूण को ससुर को अंतिम संस्कार के लिए सौंपा। पुलिस ने बताया कि रश्मि का मोबाइल और पर्स में मौजूद एटीएम उनके कब्जे में है। अभी किसी पक्ष को पर्स और मोबाइल सौंपा नहीं जाएगा। तनाव को देखते हुए पुलिस भी मोर्चरी पर मुस्तैद थी।