मौत को मात देकर 10 घंटे बाद चट्टान से जिंदा आई बाहर
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चमोली जिले के दशोली ब्लॉक में एक किशोरी चट्टान के बीच जा गिरी और 10 घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच जूझती रही। ग्रामीणों ने जान जोखिम में डालकर उसे सुरक्षित बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। ग्रामीणों की एकजुटता के बूते किशोरी को दूसरी जिंदगी मिली।
दशोली ब्लॉक के सरतोली गांव निवासी राय सिंह बिष्ट की 19 वर्षीय पुत्री मनीषा सोमवार सुबह 11 बजे गांव की अन्य महिलाओं के साथ जंगल में घास काटने गई थी। घास निकालने से पहले वह लिंगुड़ा (जंगली सब्जी) निकालने लग गई। कुछ सब्जी उसने निकालकर रास्ते के पास संभाल कर रख दी थी।
लिंगुड़ा निकालते हुए वह अन्य महिलाओं से अलग होकर दोपहर दो बजे जंगल के चट्टानी भाग तक पहुंच गई। यहां अचानक पांव फिसलने से वह करीब 40 मीटर नीचे दो चट्टानों के बीच जा गिरी। दोपहर बाद अन्य महिलाएं घरों को लौट गई, लेकिन मनीषा शाम पांच बजे तक घर नहीं लौटी।
मनीषा को ढूढ़ने में लगे तीन गांव के लोग
इसके बाद घर वालों को उसकी चिंता होने लगी। मां कमला देवी ने दूसरी महिलाओं से उसके बारे में पूछा तो कोई कुछ ही बता पाया। इसके बाद परिजन उसे ढूढ़ने पर जंगल गए। पता नहीं चलने पर रात आठ बजे गांव की सभी महिलाएं और पुरुष उसे ढूंढने के लिए जंगल को निकल पड़े।
सूचना मिलते ही ठेली और मैड़ गांव के ग्रामीण भी मनीषा को ढूंढने के लिए जंगल पहुंचे। कुछ लोगों को मनीषा की ओर से निकाले गए लिंगुड़े दिखे और उसी के आधार पर वे सीधे चट्टानी भाग में पहुंचे।
यहां से मनीषा को आवाज लगाई, लेकिन उसकी आवाज नहीं आई। रात 11 बजे जब मनीषा होश में आई और ग्रामीणों की आवाज सुनकर भाई सूरज को पुकारना शुरू किया। तब ग्रामीण मौके पर पहुंचे और काफी देर की कड़ी मशक्कत के बाद रात 12 बजे ग्रामीण नरेंद्र और बलिराम जान जोखिम में डालकर मनीषा तक पहुंचे और उसे सुरक्षित निकाल लिया।
कपड़े को फाड़कर बनाई रस्सी तब उतरे नीचे
दो लकड़ियों पर कपड़े लपेटकर स्ट्रेचर बनाया गया, इसके जरिए मनीषा को सुबह पांच बजे मजोठी गांव लाया गया और 108 सेवा से जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। सीएमएस डा. बीएस शुक्ला का कहना है कि मनीषा का एक हाथ फैक्चर हुआ है और सिर पर भी गंभीर चोटें आई हैं।
रस्सी पड़ गई छोटी
चट्टान के बीच फंसी मनीषा को बाहर निकालने के लिए ग्रामीणों ने रस्सी फेंकी, लेकिन रस्सी छोटी पड़ गई। तब कई युवाओं ने अपने कपड़े फाड़कर रस्सी की लंबाई बढ़ाई, इसके बावजूद मनीषा को नहीं निकाला जा सका। तब नरेंद्र और बलिराम जान खतरे में डालकर रस्सी को पकड़कर नीचे पहुंचे और मनीषा को निकाला।
वहीं सरतोली के प्रधान वीजेंद्र सिंह ने डीएम अशोक कुमार को घटना की जानकारी दी तो उन्होंने चमोली के थानाध्यक्ष बीएल भारती, सरतोली के पटवारी और आपदा की टीम मौके पर भेजी, लेकिन तब तक ग्रामीण मनीषा को चट्टान से निकाल चुके थे।