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Dehradun News: पुलिसकर्मियों का ग्रेड पे बढ़ाने के लिए पीएचक्यू का घेराव
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पुलिसकर्मियों का ग्रेड पे बढ़ाने की मांग के लिए सोमवार को विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों ने पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) का घेराव किया। प्रदर्शनकारी परेड ग्राउंड से मार्च निकालते हुए पीएचक्यू की ओर बढ़े, जहां पहले से तैनात पुलिस ने बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक दिया। इस दौरान खुफिया तंत्र पूरी तरह सक्रिय रहा। बड़ी संख्या में एलआईयू कर्मियों की तैनाती की गई थी।
बैरिकेड पर रुकने के बाद प्रदर्शनकारियों ने सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान आगे बढ़ने की कोशिश में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हल्की धक्का-मुक्की और झड़प भी हुई। दो प्रदर्शनकारी बैरिकेड के ऊपर चढ़ गए। इनसे झड़प के दौरान मौके पर मौजूद सीओ स्वप्लिन मुयाल को मामूली चोट लग गई। उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाकर मामला शांत कराया।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लंबे समय से पुलिसकर्मी ग्रेड पे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उनका आरोप था कि लगातार आश्वासन मिलने के बावजूद मांग पूरी नहीं होने से पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों में नाराजगी है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से शीघ्र ग्रेड पे बढ़ाने का निर्णय लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द सकारात्मक फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। वहीं पुलिस ने पूरे घटनाक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी और स्थिति पर नियंत्रण रखा। सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन देने के बाद प्रदर्शनकारी लौट गए।
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इस दौरान सुराज सेवा दल के अध्यक्ष रमेश जोशी, राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के अध्यक्ष शिव प्रसाद सेमवाल, उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के अध्यक्ष बॉबी पंवार, यूकेडी सैनिक प्रकोष्ठ के महिपाल पुंडीर, आप प्रदेश अध्यक्ष उमा सिसौदिया आदि मौजूद रहे।
Iये है मामलाI
उत्तराखंड पुलिस में सिपाहियों को भर्ती के वक्त 2000 रुपये ग्रेड पे मिलता है। पूरे सेवाकाल में उन्हें तीन एसीपी (एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन) मिलती हैं। पूर्व में एसीपी का लाभ 10, 16 व 26 वर्ष में मिलता था। इसके तहत 10 वर्ष बाद सिपाहियों को हेड कांस्टेबल का 2400 ग्रेड पे और 16 साल बाद दारोगा का 4600 ग्रेड पे मिलता था। चाहे उनकी पदोन्नति हो या न हो। तीसरा ग्रेड पे 4800 रुपये था, जो निरीक्षक का है। सातवां वेतनमान लगने के बाद यह व्यवस्था बदल दी गई। एसीपी का लाभ देने की अवधि 10, 20 व 30 वर्ष कर दी गई। इसके साथ ही दूसरे ग्रेड पे (जो 20 वर्ष की सेवा के बाद दिया जाना है) की राशि 4600 की बजाय 2800 कर दी गई। इसी बात का विरोध वर्ष 2021 में शुरू हुआ। यह वक्त था उत्तराखंड के सिपाहियों सबसे पहले बैच के 20 साल पूरे होने का। पहले सोशल मीडिया पर और फिर परिजनों सड़कों पर इकट्ठा होकर इस मांग को उठाना शुरू कर दिया। हालात ये बन गए कि वर्ष 2022 में सिपाहियों के परिजन और उन्हें समर्थन देने वाले लोग सीएम आवास कूच तक करने लगे। उन्हें हाथीबड़कला बैरियर पर रोककर आश्वासन के बाद उठाया गया। सितंबर 2022 में इसका हल निकला कि पुलिस में अपर उपनिरीक्षक (एसआई) का पद बना दिया गया। इस पर हेड कांस्टेबलों को प्रमोशन देकर उन्हें 4200 का ग्रेड पे दिया गया। इसे बाद सिपाहियों को जो प्रमोशन के दायरे में आते थे उन्हें 2800 ग्रेड पे के साथ हेड कांस्टेबल बना दिया गया। इस व्यवस्था से उस वक्त तो मामला शांत हो गया। अब फिर से कुछ संगठन इस मुद्दे को हवा दे रहे हैं।
Iखुफिया तंत्र सक्रिय, सोशल मीडिया रही नजरI
ग्रेड पे की मांग के लिए सोमवार को मार्च के मद्देनजर सोशल मीडिया पर खुफिया विभाग नजर बनाए रहा। कई दिनों से कई तरह की बातें कही जा रही हैं। कई लोग यहां तक कह रहे हैं जो सिपाहियों का हक है उसे जबरदस्ती छीना जा रहा है। कुछ संगठनों का आंदोलन बड़े आक्रोश में न तब्दील हो जाएं इसे लेकर पुलिस महकमा सतर्क रहा। यही नहीं खुफिया तंत्र भी इसके लिए सक्रिय हो गया।
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बैरिकेड पर रुकने के बाद प्रदर्शनकारियों ने सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान आगे बढ़ने की कोशिश में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हल्की धक्का-मुक्की और झड़प भी हुई। दो प्रदर्शनकारी बैरिकेड के ऊपर चढ़ गए। इनसे झड़प के दौरान मौके पर मौजूद सीओ स्वप्लिन मुयाल को मामूली चोट लग गई। उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाकर मामला शांत कराया।
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प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लंबे समय से पुलिसकर्मी ग्रेड पे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उनका आरोप था कि लगातार आश्वासन मिलने के बावजूद मांग पूरी नहीं होने से पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों में नाराजगी है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से शीघ्र ग्रेड पे बढ़ाने का निर्णय लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द सकारात्मक फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। वहीं पुलिस ने पूरे घटनाक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी और स्थिति पर नियंत्रण रखा। सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन देने के बाद प्रदर्शनकारी लौट गए।
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इस दौरान सुराज सेवा दल के अध्यक्ष रमेश जोशी, राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के अध्यक्ष शिव प्रसाद सेमवाल, उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के अध्यक्ष बॉबी पंवार, यूकेडी सैनिक प्रकोष्ठ के महिपाल पुंडीर, आप प्रदेश अध्यक्ष उमा सिसौदिया आदि मौजूद रहे।
Iये है मामलाI
उत्तराखंड पुलिस में सिपाहियों को भर्ती के वक्त 2000 रुपये ग्रेड पे मिलता है। पूरे सेवाकाल में उन्हें तीन एसीपी (एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन) मिलती हैं। पूर्व में एसीपी का लाभ 10, 16 व 26 वर्ष में मिलता था। इसके तहत 10 वर्ष बाद सिपाहियों को हेड कांस्टेबल का 2400 ग्रेड पे और 16 साल बाद दारोगा का 4600 ग्रेड पे मिलता था। चाहे उनकी पदोन्नति हो या न हो। तीसरा ग्रेड पे 4800 रुपये था, जो निरीक्षक का है। सातवां वेतनमान लगने के बाद यह व्यवस्था बदल दी गई। एसीपी का लाभ देने की अवधि 10, 20 व 30 वर्ष कर दी गई। इसके साथ ही दूसरे ग्रेड पे (जो 20 वर्ष की सेवा के बाद दिया जाना है) की राशि 4600 की बजाय 2800 कर दी गई। इसी बात का विरोध वर्ष 2021 में शुरू हुआ। यह वक्त था उत्तराखंड के सिपाहियों सबसे पहले बैच के 20 साल पूरे होने का। पहले सोशल मीडिया पर और फिर परिजनों सड़कों पर इकट्ठा होकर इस मांग को उठाना शुरू कर दिया। हालात ये बन गए कि वर्ष 2022 में सिपाहियों के परिजन और उन्हें समर्थन देने वाले लोग सीएम आवास कूच तक करने लगे। उन्हें हाथीबड़कला बैरियर पर रोककर आश्वासन के बाद उठाया गया। सितंबर 2022 में इसका हल निकला कि पुलिस में अपर उपनिरीक्षक (एसआई) का पद बना दिया गया। इस पर हेड कांस्टेबलों को प्रमोशन देकर उन्हें 4200 का ग्रेड पे दिया गया। इसे बाद सिपाहियों को जो प्रमोशन के दायरे में आते थे उन्हें 2800 ग्रेड पे के साथ हेड कांस्टेबल बना दिया गया। इस व्यवस्था से उस वक्त तो मामला शांत हो गया। अब फिर से कुछ संगठन इस मुद्दे को हवा दे रहे हैं।
Iखुफिया तंत्र सक्रिय, सोशल मीडिया रही नजरI
ग्रेड पे की मांग के लिए सोमवार को मार्च के मद्देनजर सोशल मीडिया पर खुफिया विभाग नजर बनाए रहा। कई दिनों से कई तरह की बातें कही जा रही हैं। कई लोग यहां तक कह रहे हैं जो सिपाहियों का हक है उसे जबरदस्ती छीना जा रहा है। कुछ संगठनों का आंदोलन बड़े आक्रोश में न तब्दील हो जाएं इसे लेकर पुलिस महकमा सतर्क रहा। यही नहीं खुफिया तंत्र भी इसके लिए सक्रिय हो गया।